Crude Oil Price Surge: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच मंगलवार को तेल की कीमतों में करीब 3% तक की तेजी दर्ज की गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 2.81% की बढ़त के साथ 103.03 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.80% की तेजी के साथ 95.03 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ी वजह
कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना बताया जा रहा है. यह फारस की खाड़ी में स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल का व्यापार होता है. ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ता है.
वैश्विक तनाव का असर
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग को बंद कर दिया गया है. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और बाजार में अस्थिरता बढ़ी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के चलते पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है.
भारत के लिए राहत की कोशिश
इस संकट के बीच भारत लगातार ईरान के साथ बातचीत कर रहा है ताकि भारतीय जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके. ईरान ने भारत के दो एलपीजी से भरे जहाजों— शिवालिक और नंदा देवी — को आवाजाही की अनुमति दे दी है. इनमें से शिवालिक जहाज गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच चुका है, जबकि नंदा देवी कांडला पोर्ट पर डॉक करेगा. इससे देश में एलपीजी आपूर्ति को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
तेल आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात से भारतीय जहाज ‘जग लाडकी’ करीब 80,000 टन कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हो चुका है. यह जहाज इस सप्ताह भारत पहुंचने वाला है, जिससे देश में तेल की आपूर्ति में और सुधार होगा.
एशियाई देशों पर ज्यादा असर
विश्लेषकों के अनुसार भारत सहित कई एशियाई देश खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या बाधा इन देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है. आने वाले दिनों में अगर स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
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