डेलॉयट इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में ऑटो सेक्टर की रिकवरी में सबसे बड़ी भूमिका दोपहिया वाहनों ने निभाई. इस सेगमेंट में थोक बिक्री साल-दर-साल 10.7% बढ़ी, जबकि खुदरा बिक्री में 13.4% की वृद्धि दर्ज की गई. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि मध्यम वर्ग और रोजमर्रा के उपयोगकर्ताओं के बीच दोपहिया वाहनों की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है.
दिलचस्प बात यह है कि केवल बेसिक सेगमेंट ही नहीं, बल्कि प्रीमियम मोटरसाइकिल की मांग में भी जबरदस्त उछाल देखा गया, जो 40.7% तक पहुंच गया. इससे यह संकेत मिलता है कि ग्राहक अब बेहतर परफॉर्मेंस और स्टाइल के लिए अधिक खर्च करने को तैयार हैं. वहीं स्कूटर सेगमेंट ने भी 18.5% की वृद्धि के साथ स्थिर और मजबूत प्रदर्शन किया.
पैसेंजर व्हीकल बाजार में बदला ट्रेंड
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में भी सुधार तो देखने को मिला, लेकिन मांग का पैटर्न साफ तौर पर बदलता नजर आया. जहां पारंपरिक एंट्री-लेवल कारों की मांग दबाव में रही, वहीं मिड-साइज और प्रीमियम सेगमेंट की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती गई. यह बदलाव दर्शाता है कि ग्राहक अब सिर्फ कम कीमत नहीं, बल्कि बेहतर फीचर्स, आराम और टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता दे रहे हैं. ऑटो कंपनियों ने भी इस ट्रेंड को समझते हुए अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को उसी दिशा में संतुलित किया, ताकि ग्राहकों को बजट के भीतर ज्यादा वैल्यू मिल सके.
कमर्शियल व्हीकल्स में इंफ्रास्ट्रक्चर ने भरी रफ्तार
कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी करीब 12.6% की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस बात का संकेत है कि देश में आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं. इस बढ़ोतरी के पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी और पुराने वाहनों को बदलने की मांग अहम कारण रही. सड़क निर्माण, लॉजिस्टिक्स और कंस्ट्रक्शन से जुड़े प्रोजेक्ट्स में बढ़ोतरी ने इस सेगमेंट को मजबूती दी है.
EV की रफ्तार बढ़ी, लेकिन चुनौतियां अब भी बाकी
इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार जरूर बढ़ी है, लेकिन यह अभी भी पूरी तरह संतुलित नहीं है. दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में 21.8% की वृद्धि हुई, लेकिन कुल बाजार में इनकी हिस्सेदारी अभी भी केवल 6.5% तक ही सीमित है. इसकी सबसे बड़ी वजह EV की ऊंची लागत और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है.
राज्य स्तर पर देखें तो केरल 14.1% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा, जबकि कर्नाटक और ओडिशा में भी अच्छी बढ़त देखी गई. दूसरी ओर महाराष्ट्र में बिक्री बढ़ने के बावजूद EV की हिस्सेदारी घटकर 9.2% रह गई, क्योंकि पारंपरिक वाहनों की मांग में फिर से उछाल आया.
GST बदलाव से बढ़ी मिड-सेगमेंट बाइक्स की मांग
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 के दूसरे हिस्से में GST में बदलाव और कीमतों में कमी के चलते 350cc से कम इंजन वाली मोटरसाइकिलें सस्ती हो गईं. इससे इनकी कीमतें कम्यूटर बाइक्स के करीब आ गईं, जिसके कारण मिड-रेंज मोटरसाइकिलों की मांग में तेजी आई. यह ट्रेंड खासकर युवा ग्राहकों के बीच ज्यादा देखने को मिला.
एंट्री-लेवल दबाव में, प्रीमियम ने संभाली इंडस्ट्री
पूरे ऑटो सेक्टर में एक स्पष्ट ट्रेंड सामने आया—एंट्री-लेवल वाहनों की मांग लगातार दबाव में रही, जबकि प्रीमियम और फीचर-रिच वाहनों ने इंडस्ट्री की ग्रोथ को संभाले रखा. यह बदलाव खासकर शहरी बाजारों में ज्यादा स्पष्ट रहा, जहां ग्राहकों की आय और प्राथमिकताओं में बदलाव के कारण वे ज्यादा एडवांस और आरामदायक विकल्पों की ओर झुक रहे हैं.
भविष्य की दिशा तय करेंगी नीतियां
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में भारत-यूरोप फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और नई EV नीतियां इस सेक्टर को और मजबूती दे सकती हैं. अगर लागत कम होती है और इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होता है, तो इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी में तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है, जो ऑटो इंडस्ट्री के अगले चरण की ग्रोथ को तय करेगी.
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