गैस के दाम बढ़े तो थाली पर वार! इडली-डोसा तक होंगे महंगे, 40% तक बढ़ सकते हैं रेट

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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LPG Price Hike Food Price: देश में बढ़ती महंगाई का असर अब सीधे आपकी थाली तक पहुंचता नजर आ रहा है. कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने होटल और रेस्तरां कारोबारियों की लागत बढ़ा दी है, जिसका बोझ अब ग्राहकों पर पड़ने वाला है. हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि आने वाले दिनों में बाहर खाना—चाहे वह साधारण नाश्ता ही क्यों न हो—पहले से काफी महंगा हो सकता है.

रेस्तरां संचालकों का कहना है कि बढ़ती लागत के बीच उनके पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. अगर यही स्थिति बनी रही, तो आम लोगों के लिए रोजमर्रा का खाना भी महंगा पड़ सकता है.

40% तक बढ़ सकते हैं खाने के दाम

उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर अब मेन्यू पर दिखेगा. इडली, डोसा और पोंगल जैसे आम खाद्य पदार्थों की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. पोंगल की एक प्लेट, जो फिलहाल करीब 80 रुपए में मिलती है, उसकी कीमत बढ़कर 110 से 115 रुपए तक पहुंच सकती है. वहीं डोसा, जिसकी कीमत अभी 150 रुपए के आसपास है, वह 200 रुपए या उससे अधिक हो सकता है. इससे साफ है कि जो खाना अब तक आम आदमी की पहुंच में था, वह धीरे-धीरे महंगा होता जा रहा है.

कमर्शियल LPG सिलेंडर 3200 रुपए के पार

इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम हैं. चेन्नई में इसकी कीमत 3200 रुपए से ऊपर पहुंच चुकी है, जो होटल-रेस्तरां कारोबारियों के लिए बड़ा झटका है. इसके उलट, घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है. इससे कमर्शियल और घरेलू उपयोग के बीच लागत का अंतर और ज्यादा बढ़ गया है, जिसका सीधा असर व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है.

रोज 5–10 सिलेंडर की खपत, बढ़ता दबाव

रेस्तरां इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा पूरी तरह गैस पर निर्भर करता है. कई होटल और रेस्तरां रोजाना 5 से 10 सिलेंडर तक इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में कीमत बढ़ने का असर सीधे उनके दैनिक खर्च पर पड़ता है. बढ़ती लागत को देखते हुए कुछ प्रतिष्ठानों ने ऐसे व्यंजनों की तैयारी कम करनी शुरू कर दी है, जिनमें ज्यादा गैस की खपत होती है. इससे मेन्यू में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.

बिजली भी नहीं दे रही राहत

कुछ रेस्तरां संचालक गैस के बढ़ते खर्च से बचने के लिए बिजली से खाना पकाने के विकल्प तलाश रहे हैं. लेकिन बिजली की ऊंची दरें इस विकल्प को भी महंगा बना देती हैं. यानी कारोबारियों के पास लागत कम करने के ज्यादा विकल्प नहीं हैं और उन्हें मजबूरन कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं.

होटल ही नहीं, PG और हॉस्टल भी प्रभावित

इस महंगाई का असर सिर्फ रेस्तरां तक सीमित नहीं है. निजी हॉस्टल और पेइंग गेस्ट (PG) आवास भी खाना बनाने के लिए कमर्शियल LPG सिलेंडर पर निर्भर होते हैं. ऐसे में उनकी लागत भी तेजी से बढ़ रही है, जिसका असर अंततः छात्रों और कामकाजी लोगों की जेब पर पड़ेगा.

सप्लाई की समस्या ने बढ़ाई परेशानी

कई छोटे ऑपरेटरों को तेल कंपनियों द्वारा औपचारिक कमर्शियल उपभोक्ता का दर्जा नहीं मिलता. इसके कारण उन्हें निजी सप्लायर पर निर्भर रहना पड़ता है, जहां सप्लाई अनियमित रहती है. कमी के समय कीमतें और ज्यादा बढ़ जाती हैं, जिससे छोटे कारोबारियों के सामने अतिरिक्त मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं.

राहत की मांग, नहीं तो संकट गहराएगा

आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े लोग सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि बिजली दरों में कमी, टैक्स में छूट और ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण जैसे कदम जरूरी हैं. उद्योग के जानकारों का मानना है कि अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो इसका असर व्यापक होगा. इससे न सिर्फ आम उपभोक्ताओं के लिए खाना महंगा होगा, बल्कि छोटे और मध्यम स्तर के फूड बिजनेस के अस्तित्व पर भी संकट गहरा सकता है.

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