India-Pakistan Nuclear Conflict : अमेरिकी सीनेट में बुधवार को पेश की गई ‘यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी’ की वार्षिक खतरे के आकलन रिपोर्ट का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों के चलते परमाणु संघर्ष का जोखिम अभी भी बना हुआ है. इस रिपोर्ट में कहा गया कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश सीधे तौर पर संघर्ष शुरू करने की इच्छा नहीं रखते, लेकिन आतंकवादी तत्वों की ओर से संकट पैदा करने और उसे बढ़ावा देने वाली परिस्थितियां मौजूद हैं.
दोनों देशों में हो चुके हैं टकराव
इतना ही नही बल्कि रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि ”भारत-पाकिस्तान संबंध की वजह से परमाणु संघर्ष का खतरा बना हुआ है. इसके पहले भी दोनों देशों के बीच कई टकराव हो चुके हैं, जिसकी वजह से तनाव बढ़ने की उम्मीद है. क्योंकि पिछले साल जम्मू-कश्मीर में पहलगाम के पास हुए आतंकी हमले के बाद संघर्ष भड़कने के खतरों को बढ़ा दिया है.”
आतंकवादी तत्वों पर संकट की स्थिति
इस मामले को लेकर रिपोर्ट का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप के कारण हाल के परमाणु तनाव में कमी आई है और हमारा मूल्यांकन है कि दोनों देश खुली जंग में वापस लौटना नहीं चाहते हैं, लेकिन इसके बावजूद भी आतंकवादी तत्वों द्वारा संकट की स्थितियां बनी हुई हैं. बता दें कि इस्लामाबाद अफगानिस्तान में पाकिस्तान-विरोधी आतंकवादी समूहों की मौजूदगी से लगातार चिंतित और निराश रहा है, जबकि पाकिस्तान को अपनी सीमाओं पर बढ़ती आतंकवादी हिंसा का सामना करना पड़ रहा है.
अमेरिका को निशाना बनाने में पाक मिसाइल सक्षम
साथ ही यह भी बता दें कि अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस प्रमुख तुलसी गबार्ड ने सीनेटरों को संबोधित किया था और कहा था कि पाकिस्तान की ओर से विकसित लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में ऐसी मिसाइलें भी शामिल हो सकती हैं जो कि अमेरिका को निशाना बनाने में सक्षम हों. प्राप्त जानकारी के अनुसार अमेरिका को होने वाले मिसाइल खतरे वर्तमान में 3,000 से अधिक मिसाइलों से बढ़कर 2035 तक 16,000 से अधिक मिसाइलों तक पहुंच सकते हैं.
अमेरिका के लिए बढ़ा खतरा
इस मामले पर तुलसी गबार्ड ने जोर देते हुए कहा कि अमेरिका की सुरक्षित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता सामरिक खतरों से राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करती है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ”रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान परमाणु और पारंपरिक पेलोड से लैस कई नवीन, उन्नत या पारंपरिक मिसाइल वितरण प्रणालियों पर शोध और विकास कर रहे हैं, जो कि हमारे देश को खतरे की जद में ला सकते हैं.”
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