MSME Growth India: भारत के लघु एवं मध्यम उद्यम (SME) अब तेजी से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं. मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और डिजिटलीकरण पर बढ़ते फोकस के कारण भारतीय MSME सेक्टर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी होता जा रहा है.
FTA से बढ़ी वैश्विक पहुंच
एमएसएमई संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य खागेन मुर्मु ने कहा कि यूएई, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते भारतीय SMEs के लिए गेमचेंजर साबित हो रहे हैं. इन समझौतों के जरिए शून्य या कम टैरिफ का लाभ मिल रहा है, जिससे वस्त्र, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के उत्पाद वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं.
निर्यात में अहम योगदान
भारत के कुल निर्यात में MSME सेक्टर की हिस्सेदारी लगभग 45 से 48 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. यह दर्शाता है कि यह सेक्टर तेजी से वैश्विक वैल्यू चेन का हिस्सा बन रहा है और देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है.
डिजिटल बदलाव से नई ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और बेहतर नियामक ढांचा MSME सेक्टर की ग्रोथ को और तेज करेगा. डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीक के इस्तेमाल से छोटे व्यवसाय अब बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंच बना पा रहे हैं.
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ा अवसर
सरकार के उद्यम पोर्टल और GeM जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म बाजार तक पहुंच को आसान बना रहे हैं. इससे बिचौलियों की भूमिका कम हो रही है और MSME सीधे ग्राहकों से जुड़ पा रहे हैं. हालांकि, विशेषज्ञों ने इस दिशा में जागरूकता और क्षमता निर्माण की जरूरत पर भी जोर दिया है.
500 अरब डॉलर का अवसर
दिल्ली एनसीआर सरकार की सचिव पद्मा जायसवाल के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सेवाएं भारतीय SMEs के लिए 500 अरब डॉलर तक के अतिरिक्त बाजार अवसर खोल सकती हैं.
डिजिटल सेवाओं का बढ़ता योगदान
उन्होंने बताया कि भारत के निर्यात और जीडीपी में डिजिटल सेवाओं का योगदान करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए SMEs सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकते हैं.
डिजिटल बनना अब जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल एकीकरण अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है. वैश्विक बाजारों में टिके रहने और आगे बढ़ने के लिए MSME सेक्टर को तकनीक अपनानी ही होगी.

