कुवैत स्थित अली अल सलेम एयरबेस पर देर रात ईरान ने ड्रोन हमला किया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में कम से कम 15 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि इनमें से ज्यादातर सैनिक प्राथमिक उपचार के बाद अपनी ड्यूटी पर वापस लौट चुके हैं.
पहले से जारी ऑपरेशन में सैकड़ों अमेरिकी घायल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएस सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी है कि ईरान से जुड़े ऑपरेशन के दौरान अब तक 373 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं. इस ताजा हमले ने पहले से ही तनावपूर्ण हालात को और गंभीर बना दिया है.
ईरान का पलटवार, ट्रंप की धमकियों को बताया ‘भ्रमपूर्ण’
ईरान की सेना ने इस हमले को अमेरिका की धमकियों का जवाब बताया है. ईरान की शीर्ष सैन्य कमान के प्रवक्ता ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की धमकियां ‘भ्रमपूर्ण’ हैं और इससे अमेरिका को मिली बेइज्जती की भरपाई नहीं हो सकती. सरकारी मीडिया के अनुसार, खातम अल-अंबिया मुख्यालय के प्रवक्ता ने भी अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की बयानबाजी का कोई असर नहीं पड़ेगा.
अमेरिका की सख्त चेतावनी, ‘पाषाण युग’ में भेजने की धमकी
इससे पहले व्हाइट हाउस ने ईरान को सख्त चेतावनी दी थी. अमेरिका ने कहा था कि अगर ईरान तय समय सीमा से पहले बातचीत में गंभीरता नहीं दिखाता, तो उसे ‘विनाशकारी सैन्य कार्रवाई’ का सामना करना पड़ेगा. ट्रंप ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमति नहीं बनी, तो ईरान के ऊर्जा ढांचे—जैसे बिजली संयंत्र और पुल—को निशाना बनाया जा सकता है.
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, वैश्विक चिंता बढ़ी
इस हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है. मध्य पूर्व में पहले से ही हालात नाजुक बने हुए हैं और अब इस घटना ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो यह टकराव बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है.

