Mutual Fund Investment: एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने में एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में 40,450.26 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया है. यह जुलाई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. इससे पहले फरवरी में यह आंकड़ा 25,977.81 करोड़ रुपए था. यह तेजी इस बात का संकेत है कि निवेशकों का रुझान फिर से इक्विटी बाजार की ओर मजबूत हुआ है.
पूरे उद्योग में निकासी, डेट फंड्स बने मुख्य वजह
हालांकि, पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग की बात करें तो मार्च के दौरान 2.39 लाख करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी दर्ज की गई, जबकि फरवरी में 94,530 करोड़ रुपए का निवेश आया था. इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह डेट म्यूचुअल फंड्स से भारी निकासी रही, जिसने कुल आंकड़ों को प्रभावित किया.
SIP निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड
मार्च महीने में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP के जरिए निवेश ने नया रिकॉर्ड बनाया. इस दौरान SIP योगदान बढ़कर 32,087 करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो फरवरी के 29,845 करोड़ रुपए से अधिक है. यह दर्शाता है कि खुदरा निवेशक लगातार बाजार में बने हुए हैं और नियमित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं.
निवेश बढ़ने के पीछे ये रहे प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश में आई इस तेजी के पीछे कई कारण रहे. इनमें SIP के जरिए लगातार निवेश, वित्त वर्ष के अंत में पोर्टफोलियो समायोजन और हालिया बाजार गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखना शामिल है. इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से बाजार में आई अस्थिरता ने दीर्घकालिक निवेशकों को आकर्षक प्रवेश बिंदु दिए, जिससे इक्विटी में निवेश बढ़ा.
फ्लेक्सी-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप में बढ़ी भागीदारी
इक्विटी कैटेगरी के सभी सेगमेंट्स में निवेश में बढ़ोतरी दर्ज की गई. फ्लेक्सी-कैप फंड्स सबसे आगे रहे, जहां मार्च में 10,054.12 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि फरवरी में यह 6,924.65 करोड़ रुपए था. मिड-कैप फंड्स में 6,063.53 करोड़ रुपए और स्मॉल-कैप फंड्स में 6,263.56 करोड़ रुपए का इनफ्लो आया, जो फरवरी के मुकाबले काफी ज्यादा है. इसके अलावा, लार्ज-कैप फंड्स में 2,997.84 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स में 2,698.82 करोड़ रुपए का स्थिर निवेश देखा गया.
डेट और हाइब्रिड फंड्स में भारी निकासी
इसके विपरीत, डेट म्यूचुअल फंड्स में मार्च के दौरान 2.94 लाख करोड़ रुपए की भारी निकासी दर्ज की गई, जबकि फरवरी में इनमें 42,106.31 करोड़ रुपए का निवेश आया था. ओवरनाइट और लिक्विड फंड्स इस निकासी के मुख्य कारण रहे. हाइब्रिड स्कीम्स में भी 16,538.47 करोड़ रुपए की निकासी हुई, जबकि आर्बिट्रेज फंड्स से 21,113.70 करोड़ रुपए बाहर निकाले गए.
गोल्ड ETF और NFO का हाल
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF में निवेश घटकर 2,266 करोड़ रुपए रह गया, जो फरवरी के 5,254.95 करोड़ रुपए का लगभग आधा है. वहीं नए फंड ऑफर यानी NFO के जरिए मार्च में 24 लॉन्च के माध्यम से 3,985 करोड़ रुपए जुटाए गए, जबकि फरवरी में 21 स्कीम्स के जरिए 4,979 करोड़ रुपए जुटाए गए थे.
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