Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी गई है. इसी के साथ ही यह सोमवार से लागू हो गई है. इससे दोनों देशों के बीच तनाव अब और बढ़ गया है. अमेरिकी सेना के अनुसार यह नाकेबंदी खास तौर पर ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाज़ों पर लागू होगी. हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले उन जहाज़ों को नहीं रोका जाएगा जो गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं.
देश की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन
वहीं, ईरान ने इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर-सईद इरावानी ने इसे देश की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताया है. उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के खिलाफ है. अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान पर आर्थिक आतंकवाद का आरोप लगाया. कहा कि अगर ईरान दुनिया को ब्लैकमेल करने की कोशिश करेगा तो अमेरिका भी वैसा ही जवाब देगा.
अब भी हॉर्मुज़ से गुजर रहे हैं कुछ जहाज़
उन्होंने कहा कि अगर ईरानी जहाज़ों को रोकने की कोशिश होगी तो कोई भी ईरानी जहाज़ बाहर नहीं निकल पाएगा. शिपिंग डेटा के अनुसार कुछ जहाज़ अब भी हॉर्मुज़ से गुजर रहे हैं. एक टैंकर यूएई से चीन की ओर जाते हुए इस रास्ते से पार हुआ, जिससे संकेत मिलता है कि पूरी तरह से आवाजाही बंद नहीं हुई है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी सभी पक्षों से अपील की है कि वे हॉर्मुज़ में नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करें, क्योंकि यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
और बढ़ गया सैन्य टकराव का खतरा
इस नाकेबंदी का फैसला तब लिया गया, जब पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल हो गई. अब इस कदम से क्षेत्र में सैन्य टकराव का खतरा और बढ़ गया है. वहीं, एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिका में लेबनान और इज़राइल के अधिकारियों के बीच सीधे वार्ता की तैयारी हो रही है, जो कई दशकों बाद पहली बार हो रही है.
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