भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में 2026 की पहली तिमाही में डील गतिविधियां सालाना आधार पर 14% बढ़ीं

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Real Estate India: भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में डील्स की संख्या में बढ़त दर्ज की गई है. सालाना आधार पर डील्स की संख्या बढ़कर 32 हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 28 थी. इससे पहले की तिमाही में कुल 26 डील्स हुई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सेक्टर में निवेशकों की सक्रियता लगातार बनी हुई है और सौदों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है.

डील वैल्यू में आई हल्की गिरावट

ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में बड़े सौदों के अभाव के कारण कुल डील वैल्यू में हल्की नरमी देखने को मिली है. जनवरी से मार्च की अवधि में कुल डील वैल्यू 763 मिलियन डॉलर रही. यह संकेत देता है कि हालांकि सौदों की संख्या बढ़ी है, लेकिन निवेश का आकार अपेक्षाकृत छोटा रहा है.

छोटे और मध्यम सौदों की ओर झुकाव

रिपोर्ट में बताया गया कि डील्स की संख्या में बढ़ोतरी और वैल्यू में कमी यह दर्शाती है कि निवेशक अब बड़े सौदों की बजाय छोटे और मध्यम आकार के सौदों की तरफ अधिक आकर्षित हो रहे हैं. यह ट्रेंड बाजार में सतर्कता और जोखिम प्रबंधन की बदलती रणनीति को दर्शाता है.

विलय और अधिग्रहण सेगमेंट आगे

डील की संख्या में विलय और अधिग्रहण सेगमेंट 19 सौदों के साथ शीर्ष पर रहा. हालांकि बड़े सौदों की कमी के कारण इस सेगमेंट की वैल्यू घटकर 305 मिलियन डॉलर रह गई. इससे यह साफ है कि सौदों की संख्या तो अधिक रही, लेकिन उनका आकार अपेक्षाकृत छोटा रहा.

ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और रियल एस्टेट उद्योग प्रमुख शबाला शिंदे ने कहा, “इस तिमाही में मध्यम आकार की और आय उत्पन्न करने वाली संपत्तियों की ओर स्पष्ट रुझान देखने को मिला, जिसमें घरेलू गतिविधि का दबदबा बना रहा और निजी इक्विटी पूंजी का एक प्रमुख स्रोत बनी रही.

शिंदे ने आगे कहा, निवेश के रुझानों से वाणिज्यिक संपत्तियों, विशेष रूप से कार्यालय और खुदरा प्लेटफॉर्मों के प्रति मजबूत रुझान का संकेत मिला, जो स्पष्ट यील्ड और स्थिर नकदी प्रवाह द्वारा समर्थित है, जबकि आरईआईटी के नेतृत्व वाले लेनदेन ने उच्च गुणवत्ता वाली, आय उत्पन्न करने वाली संपत्तियों में संस्थागत विश्वास को और मजबूत किया है.

उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, सौदों का माहौल लचीला बना रहा, हालांकि निवेशक अधिक चयनात्मक दृष्टिकोण अपना रहे हैं और चल रही व्यापक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच संपत्ति-स्तर के प्रदर्शन और निष्पादन की निश्चितता को प्राथमिकता दे रहे हैं.

प्राइवेट इक्विटी निवेश में बढ़त

प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल गतिविधियों में भी इस तिमाही में मजबूती देखने को मिली. कुल 13 सौदों के जरिए 458 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया, जो पिछले एक वर्ष में सबसे अधिक तिमाही मात्रा है. हालांकि पिछली तिमाही में बड़े सौदे नहीं होने के कारण कुल वैल्यू में क्रमिक आधार पर 71 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

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