Gartner Report: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक नई रिपोर्ट ने डिजिटल प्राइवेसी को लेकर गंभीर चेतावनी दी है. रिसर्च एवं एडवाइजरी फर्म गार्टनर का कहना है कि वर्ष 2029 तक अधिकांश प्राइवेसी से जुड़ी घटनाएं व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी (PII) की चोरी या डेटा लीक की वजह से नहीं, बल्कि AI द्वारा लोगों के बारे में निकाले गए निष्कर्षों (AI-Generated Inferences) के कारण होंगी. रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में साइबर खतरे सिर्फ डेटा चोरी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि AI सामान्य और अनाम डेटा से भी किसी व्यक्ति की निजी जानकारी का अनुमान लगाने में सक्षम होगा.
AI बिना डेटा लीक के भी निकाल सकता है निजी जानकारी
गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेटिव AI और मशीन लर्निंग में तेजी से हो रही प्रगति के कारण साइबर हमलावर अब सामान्य, अनाम या एकत्रित डेटा से भी किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, व्यवहार संबंधी पैटर्न और अन्य संवेदनशील जानकारियों का अनुमान लगा सकते हैं. यानी किसी व्यक्ति का निजी डेटा सीधे लीक न होने पर भी AI उसके बारे में कई अहम और निजी निष्कर्ष तैयार कर सकता है.
डेटा एक्सपोजर से इनसाइट एक्सपोजर की ओर बढ़ रही दुनिया
गार्टनर के वाइस प्रेसिडेंट एनालिस्ट बार्ट विलेमसन ने कहा, “दुनिया अब डेटा एक्सपोजर से इनसाइट एक्सपोजर की ओर बढ़ रही है.” उन्होंने कहा कि अब तक कंपनियां मुख्य रूप से व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखने पर ध्यान देती थीं, लेकिन AI बिना पारंपरिक सुरक्षा तंत्र को तोड़े भी लोगों के बारे में बेहद निजी जानकारियों का अनुमान लगा सकता है. उनके अनुसार, भविष्य में प्राइवेसी से जुड़े जोखिम इस बात से अधिक पैदा होंगे कि AI किसी व्यक्ति के बारे में क्या निष्कर्ष निकालता है, न कि केवल कौन-सा डेटा सार्वजनिक हुआ है.
इनफरेंस अटैक बन सकते हैं नई चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि Inference Attacks सबसे खतरनाक साइबर जोखिमों में शामिल हो सकते हैं, क्योंकि इन्हें पारंपरिक साइबर सुरक्षा प्रणालियों से पहचानना बेहद मुश्किल होता है. ऐसे मामलों में डेटा चोरी नहीं होता, बल्कि AI किसी व्यक्ति के बारे में ऐसे निष्कर्ष तैयार कर देता है जो उसकी निजता और डेटा की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं. इन्हें समझना, पहचानना और रोकना भी काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है.
2028 तक डेटा इंटीग्रिटी पर बढ़ेगा निवेश
गार्टनर का अनुमान है कि वर्ष 2028 तक कंपनियां डेटा की गोपनीयता (Privacy) पर जितना खर्च करेंगी, लगभग उतना ही निवेश डेटा की अखंडता (Data Integrity) सुनिश्चित करने पर भी करेंगी. इसकी वजह AI द्वारा तैयार की गई गलत, पक्षपातपूर्ण या अनधिकृत प्रोफाइल से बढ़ता जोखिम होगा, जिससे कंपनियों को नए सुरक्षा उपाय अपनाने पड़ सकते हैं.
कंपनियों को बदलनी होगी प्राइवेसी रणनीति
रिपोर्ट में कहा गया है कि जो संस्थाएं अभी भी प्राइवेसी को केवल डेटा सुरक्षा का विषय मानकर चल रही हैं, वे आने वाले वर्षों में AI आधारित इनफरेंस जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील होंगी. गार्टनर ने सुझाव दिया है कि कंपनियों को अपनी प्राइवेसी रणनीति में AI गवर्नेंस को शामिल करना चाहिए. इसके साथ ही डिफरेंशियल प्राइवेसी, सिंथेटिक डेटा जैसी प्राइवेसी बढ़ाने वाली तकनीकों को अपनाने, डेटा संग्रह को न्यूनतम रखने, सख्त एक्सेस कंट्रोल लागू करने और समय पर डेटा हटाने जैसी प्रक्रियाओं को मजबूत करना चाहिए, ताकि AI आधारित अनुमान लगाने वाले हमलों के खतरे को कम किया जा सके.
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