New Sim Card Rules 2026: ऑनलाइन ठगी अब केवल एक सामान्य समस्या नहीं रही, बल्कि यह हर मोबाइल उपयोग करने वाले व्यक्ति के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है. कभी ठग खुद को अधिकारी बताकर डराते हैं, तो कभी झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठ लेते हैं.
ऐसे लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए अब केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. सरकार ने देश की सर्वोच्च अदालत में एक विस्तृत प्रतिवेदन पेश किया है, जिसमें ऐसे ठगों पर लगाम लगाने के लिए ठोस योजना तैयार की गई है. सिम से लेकर पहचान तक पूरे तंत्र में बड़े बदलाव की तैयारी है.
इस संबंध में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने भारत का सर्वोच्च न्यायालय में विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है. गृह मंत्रालय की ओर से दाखिल इस प्रतिवेदन में कंपनियों, बैंकों और ऑनलाइन सेवाएं देने वाले मंचों की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ धोखाधड़ी रोकने के लिए मजबूत तकनीकी और कानूनी उपाय सुझाए गए हैं.
सरकार का स्पष्ट कहना है कि अब ठगी करने वालों के लिए बच निकलना आसान नहीं होगा और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी.
डिजिटल गिरफ्तारी पर सख्त रोक
डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर लोगों को डराकर पैसे वसूलने वाले गिरोहों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था तैयार करने की बात कही है. ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि पीड़ितों को तुरंत राहत मिल सके और दोषियों तक पहुंच आसान हो.
सिम से जुड़ेंगे संदेश मंच, पहचान होगी अनिवार्य
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार संदेश सेवा मंचों को मोबाइल सिम से जोड़ा जाएगा. इससे यह पता लगाना आसान होगा कि कौन व्यक्ति किस नंबर से अपना खाता चला रहा है. इसके साथ ही नया सिम लेने के लिए कड़ी पहचान जांच अनिवार्य की जाएगी.
बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली को तेजी से लागू करने की योजना है, ताकि हर उपयोगकर्ता की सही पहचान सुनिश्चित की जा सके और फर्जी खातों पर रोक लगे.
दिसंबर 2026 तक लागू होगा नया तंत्र
सरकार ने लक्ष्य रखा है कि दिसंबर 2026 तक पूरे देश में एक ऐसा तंत्र विकसित किया जाए, जिससे एक व्यक्ति के नाम पर जारी सभी सिम कार्ड की निगरानी संभव हो सके. दूरसंचार विभाग को तीन महीने के भीतर नए नियम जारी करने और छह महीने में तकनीकी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद सभी सेवा प्रदाताओं के बीच साझा निगरानी व्यवस्था लागू होगी.
10 करोड़ से बड़े मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो करेगा
सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि 10 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपी जाए. इससे बड़े मामलों में तेजी से और सख्ती से जांच संभव होगी. साथ ही पीड़ितों को राहत देने के लिए मुआवजा व्यवस्था तैयार करने का भी सुझाव दिया गया है.
9400 खाते बंद, सख्ती बढ़ेगी
प्रतिवेदन में बताया गया है कि वर्ष 2026 में इस तरह की धोखाधड़ी से जुड़े करीब 9400 खातों को बंद किया जा चुका है. अब सिम बेचने वाले दुकानदारों की जिम्मेदारी भी बढ़ाई जाएगी, ताकि बिना सही पहचान के सिम जारी न हो सके और ठगी के मामलों में कमी आए.
180 दिन तक सुरक्षित रहेगा विवरण
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बंद किए गए खातों का विवरण कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि जांच के दौरान उसका उपयोग किया जा सके. इसके साथ ही दूरसंचार उपभोक्ता पहचान नियमों को तेजी से लागू करने पर जोर दिया गया है, जिससे पूरे देश में सिम जारी करने की प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जा सके.
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?
इन नए नियमों के लागू होने के बाद आम लोगों को थोड़ी सख्ती का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इससे उनकी सुरक्षा काफी मजबूत होगी. अब बिना सही पहचान के सिम लेना मुश्किल होगा और फर्जी खातों के जरिए ठगी करना आसान नहीं रहेगा. सरकार का मानना है कि इन कदमों से ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में बड़ी कमी आएगी और लोगों का भरोसा बढ़ेगा.
यह भी पढ़े: खुशखबरीः होर्मुज पार कर भारत आ रहा LNG से लदा टैंकर जहाज, जानें क्या होती है LNG

