Manufacturing PMI May 2026: मई में मजबूत हुई मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां, नए ऑर्डर और उत्पादन में तेज उछाल

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Manufacturing PMI May 2026: भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने मई 2026 में मजबूती के साथ आगे बढ़ते हुए आर्थिक गतिविधियों के सकारात्मक संकेत दिए हैं. एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) मई में बढ़कर 55.0 पर पहुंच गया. यह अप्रैल के 54.7 और शुरुआती अनुमान 54.3 से अधिक है. आंकड़ों से संकेत मिलता है कि नए ऑर्डरों, उत्पादन और खरीद गतिविधियों में तेजी के चलते विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार और मजबूत हुई है. मई के अंतिम आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि भारत के विनिर्माण उद्योग में वृद्धि शुरुआती अनुमानों से अधिक मजबूत रही. कंपनियों ने बढ़ती मांग को देखते हुए कच्चे माल और तैयार उत्पादों का भंडार बढ़ाया, जिससे उत्पादन गतिविधियों को अतिरिक्त गति मिली.

नए ऑर्डर और उत्पादन में आई तेजी

रिपोर्ट के अनुसार मई महीने में नए ऑर्डरों और उत्पादन दोनों में फरवरी के बाद सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई. सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने बताया कि मजबूत घरेलू मांग, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी और नए कारोबारी अवसरों ने उत्पादन को बढ़ावा दिया. विशेष रूप से इंटरमीडिएट और कैपिटल गुड्स श्रेणियों में वृद्धि उपभोक्ता वस्तु निर्माताओं की तुलना में अधिक मजबूत रही. इससे यह संकेत मिलता है कि उद्योग और निवेश से जुड़ी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं.

घरेलू मांग बनी वृद्धि की सबसे बड़ी ताकत

मई के आंकड़ों से यह भी पता चला कि विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में घरेलू बाजार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही. देश के भीतर बढ़ती मांग के कारण कंपनियों को अधिक ऑर्डर मिले और उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई. हालांकि निर्यात ऑर्डरों में भी वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन उनकी रफ्तार घरेलू मांग की तुलना में कुछ धीमी रही. इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजारों से ऑर्डर मिलना जारी रहा और कई कंपनियों ने विदेशी मांग में सुधार की जानकारी दी.

एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया से मिले नए ऑर्डर

सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बिक्री में अच्छी वृद्धि देखने को मिली. कंपनियों को एशिया, यूरोप, केन्या, नाइजीरिया और पश्चिम एशिया जैसे बाजारों से नए ऑर्डर प्राप्त हुए, जिसने निर्यात गतिविधियों को समर्थन दिया. वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बावजूद विदेशी बाजारों से मिल रहे ऑर्डर भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाते हैं.

कंपनियों ने बढ़ाया स्टॉक

मई के दौरान खरीद गतिविधियों में तेज वृद्धि दर्ज की गई. बढ़ती मांग और संभावित आपूर्ति चुनौतियों को देखते हुए कंपनियों ने कच्चे माल और तैयार उत्पादों का स्टॉक बढ़ाना शुरू किया. एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “भारत का अंतिम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई संकेत देता है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कंपनियों ने एहतियात के तौर पर स्टॉक बढ़ाना जारी रखा है. उत्पादन वृद्धि में तेजी आई है, जबकि खरीद गतिविधियां और तैयार माल का भंडार भी तेज गति से बढ़ा है.” उन्होंने आगे कहा, “नए ऑर्डरों में वृद्धि मुख्य रूप से घरेलू मांग की वजह से हुई, जबकि निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि दर कुछ धीमी पड़ी है।”

लागत पर बढ़ा दबाव

रिपोर्ट के अनुसार मई महीने में कच्चे माल और खरीद लागत में बढ़ोतरी अप्रैल 2022 के बाद दूसरी सबसे तेज गति से दर्ज की गई. केवल अप्रैल 2026 में इससे अधिक वृद्धि देखने को मिली थी. ऊर्जा, ईंधन, कच्चे माल और परिवहन खर्च में वृद्धि के कारण कंपनियों की लागत बढ़ी है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर लागत पर दबाव के रूप में लगातार दिखाई दे रहा है.  हालांकि तैयार उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार पिछले एक वर्ष के औसत से कम रही.

इसका मतलब है कि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रही हैं. इस संबंध में प्रांजुल भंडारी ने कहा, “कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी की रफ्तार मई में थोड़ी कम हुई, जबकि तैयार उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी और अधिक धीमी हो गई. इससे निर्माताओं के लाभ मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है.”

तीन महीनों में सबसे मजबूत स्थिति में पहुंचा विनिर्माण क्षेत्र

अंतिम PMI आंकड़ों से यह भी पता चला कि मई में भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति पिछले तीन महीनों में सबसे अधिक मजबूत रही. नए ऑर्डर, उत्पादन, खरीद गतिविधियों और स्टॉक निर्माण में बढ़ोतरी ने उद्योग क्षेत्र को मजबूती प्रदान की. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में भी विनिर्माण क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. हालांकि वैश्विक तनाव और बढ़ती लागत उद्योगों के लिए चुनौती बने रह सकते हैं.

अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत

मई 2026 के PMI आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र अभी भी मजबूत गति से आगे बढ़ रहा है. घरेलू मांग, नए ऑर्डर, उत्पादन में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे ऑर्डर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं. हालांकि लागत दबाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, लेकिन मौजूदा आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारत का औद्योगिक क्षेत्र इन चुनौतियों के बीच भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है.

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