गधों के सहारे कर्ज उतारेगा पाकिस्तान! चीन को निर्यात करेगा मीट और खाल

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Pakistani Donkeys: कंगाल पाकिस्तान अब गधों के दम पर पर अपना खाली खजाना भरने की तैयारी कर रहा है. दरअसल, पाकिस्तान चीन को गधे के मांस और उससे संबंधित उत्पादों का निर्यात करेगा, क्योंकि चीन में पहले से ही पाकिस्तानी गधों के मांस से बने उत्पादों की डिमांड रही है. ऐसे में अब पाकिस्तान सप्लाई बढ़ाने के फिराक में है. बता दें कि पोषण एवं औषधीय गुणों से भरपूर होने की वजह से इसकी मांग चायना में ज्यादा रहती है.

पाकिस्तान के वित्तमंत्री ने दी जानकारी 

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने गुरुवार को पाकिस्तान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के तहत प्रेस वार्ता में बताया कि पाकिस्तान गधे के मांस और उससे जुड़े अन्य उत्पादों के निर्यात को चीन में बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है. क्योंकि चीन में गधे का मांस, खाल और संबंधित उत्पादों का बड़ा बाजार है. चीन में बढ़ती मांग की वजह से इसमें भविष्य के लिए बहुत संभावनाएं हैं. बता दें कि चीन में गधे का मांस, दूध और एजियाओ (जिलेटिन) को उनके पोषण तथा औषधीय गुणों के लिए महत्व दिया जाता है.’

पाक-चीन में हुए हस्ताक्षर

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने इस व्यापार को समर्थन देने के लिए चीन के साथ स्वच्छता संबंधी दिशा-निर्देशों पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे और स्थानीय किसानों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर उत्पन्न होंगे. साथ ही पाकिस्तान के ग्वादर से सप्लाई बढ़ाई जाएगी.

बता दें कि ग्वादर फ्री जोन में गधों के बूचड़खाने स्थापित करने के लिए एमएस शहजाद एंड शाओ कंपनी को नया लाइसेंस दिया गया है, जिससे लाइसेंस प्राप्त कंपनियों की संख्या एम/एस हेंगेंग ट्रेड के अलावा बढ़कर दो हो गई है.

पाकिस्तान में 62 लाख से ज्यादा गधे

वहीं, पाकिस्तान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के मुताबिक, पाकिस्तान में गधों की संख्या 2024-25 के 60 लाख से बढ़कर 2025-26 में 62 लाख हो गई है. जबकि साल 2023-24 में यह संख्या 59 लाख थी. अर्थात पाकिस्तान में गधों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो रही है. परंपरागत रूप से गधों का इस्तेमाल भारी सामान ढोने या खींचने के लिए किया जाता रहा है. वे ग्रामीण परिवारों का अहम हिस्सा रहे हैं. क्योंकि कृषि क्षेत्रों में फसल, चारा, लकड़ी और दूसरे सामानों की ढुलाई के लिए इनका इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है.

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