US-Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण अंतरिम हस्ताक्षरित समझौते के लागू होते ही युद्धविराम प्रभावी हो गया है. दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते के लिए 60 दिन की नई वार्ता प्रक्रिया शुरू हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. समझौते की मध्यस्थता करने वाले Shehbaz Sharif ने दावा किया कि दोनों नेताओं के हस्ताक्षर के बाद समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया.
तेल निर्यात पर महत्वपूर्ण छूट देने का फैसला
इस समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान को तत्काल तेल निर्यात पर महत्वपूर्ण छूट देने का फैसला किया है. इसके बाद ईरान वैश्विक बाजार में बिना बड़ी बाधाओं के अपना कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेच सकेगा. यह अमेरिका की सबसे बड़ी रियायतों में से एक है, क्योंकि तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध ही ईरान पर दबाव बनाने का सबसे प्रभावी हथियार माने जाते थे.
प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का रास्ता
इसके अलावा भविष्य में ईरान पर लगे अमेरिकी, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का रास्ता भी खुल गया है. समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Strait of Hormuz को दोबारा खोलना है. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस का व्यापार इसी मार्ग से होता है. युद्ध के दौरान जहाजों पर हमलों और सुरक्षा खतरों के कारण यहां आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई थी.
अगले 30 दिनों में सामान्य जहाजरानी बहाल
समझौते के अनुसार, जलडमरूमध्य तत्काल प्रभाव से खोला जाएगा. अगले 30 दिनों में सामान्य जहाजरानी बहाल की जाएगी. शुरुआती 60 दिनों तक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा. समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाया जाएगा. अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त की जाएगी. समझौते के अनुसार ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा.
उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम
ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करेगा. संवर्धित यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में डाउनब्लेंड किया जाएगा. अंतिम समझौते तक परमाणु गतिविधियों में यथास्थिति बनाए रखी जाएगी. अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा. हालांकि यूरेनियम संवर्धन के भविष्य और परमाणु कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा पर अभी सहमति नहीं बनी है. समझौते में ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना का भी उल्लेख किया गया है.
निवेश मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आने की उम्मीद
अमेरिकी उपराष्ट्रपति J. D. Vance के अनुसार यह निवेश मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आने की उम्मीद है. हालांकि यह राशि अंतिम समझौते और आगे की वार्ताओं पर निर्भर करेगी. समझौते पर हस्ताक्षर के बावजूद ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने सैन्य विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किए हैं. उन्होंने कहा कि यह केवल एक समझौता ज्ञापन है और यदि अमेरिका को लगे कि समझौते का पालन नहीं हो रहा, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा. यह बयान बताता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
Netanyahu के लिए एक बड़ा झटका
यह समझौता Benjamin Netanyahu की सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. इजराइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर कड़ा रुख अपनाता रहा है. समझौते में लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और युद्ध समाप्ति की बात भी शामिल है, जिस पर इजराइल ने पहले ही आपत्ति जताई है. इजराइली मीडिया और विपक्षी दलों ने भी समझौते के कई पहलुओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.
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