भारत ने चीन को द्विपक्षीय रिश्‍तों पर दी नसीहत, ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे डैम की मांगी तकनीकी जानकारी

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India-China Relation: भारत और चीन की तरफ से लंबित मुद्दों को सुलझाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है. इसके लिए बाकायदा WMCC (Working Mechanism for Consultation and Coordination) का गठन किया गया है, ताकि द्विपक्षीय वार्ता लगातार होती रहे और विवादों को सुलझाने का प्रयास जारी रहे. नई दिल्‍ली में आयोजित WMCC की बैठक में भारत ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे डैम का मुद्दा उठाया.

तकनीकी जानकारी साझा करने की मांग

भारत ने चीन से इस बांध की तकनीकी जानकारी साझा करने की मांग की है. भारत ने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा कि द्विपक्षीय रिश्‍तों को आगे बढ़ाने के लिए LAC पर शांति-व्‍यवस्‍था कायम रखना अनिवार्य है. इसी के तहत भारत ने चीन से ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे डैम के बारे में जानकारी मांगी है. भारत और चीन के बीच विवादों को निपटाने और सहयोग बढ़ाने के लिए अहम बातचीत हुई है.

वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति की समीक्षा

दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की स्थिति की समीक्षा करते हुए लंबित मुद्दों को सुलझाने और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल जारी रखने पर सहमति जताई. बातचीत के दौरान भारत ने सीमा-पार नदियों पर चीन की अपस्‍ट्रीम में चल रही परियोजनाओं को लेकर अपनी चिंता दोहराई और इन परियोजनाओं से जुड़ी तकनीकी जानकारी जल्द साझा करने की मांग की.

द्विपक्षीय रिश्‍तों में उल्‍लेखनीय सुधार

खासकर ब्रह्मपुत्र नदी पर 137 अरब डॉलर की लागत से बनाई जा रही बांध पर भारत ने चीन से जानकारी मांगी है. भारत ने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा कि सीमा पर शांति के बाद ही द्विपक्षीय रिश्‍तों में उल्‍लेखनीय सुधार आएगी. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नई दिल्ली में भारत-चीन सीमा मामलों पर WMCC की 36वीं बैठक हुई. बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में पूर्वी एशिया के संयुक्त सचिव सुजीत घोष ने किया, जबकि चीन की ओर से विदेश मंत्रालय के सीमा एवं समुद्री मामलों के विभाग के महानिदेशक होउ यांकी ने वार्ता की अगुवाई की.

मुद्दों पर स्पष्ट और खुली बातचीत

दोनों पक्षों ने बैठक में LAC पर स्थिति की व्यापक समीक्षा की और सीमा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर स्पष्ट और खुली बातचीत की. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पिछले वर्ष सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों के बीच हुई 24वें दौर की वार्ता के नतीजों को आगे बढ़ाते हुए दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, संस्थागत तंत्र विकसित करने और सीमा-पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. वार्ता में सीमा पार नदियों का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा.

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