LPG Rate Today on June 19: घरेलू गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. पिछले कुछ महीनों में लगातार हुए दामों के इजाफे के बाद अब करोड़ों उपभोक्ताओं की नजर अगली समीक्षा पर टिकी हुई है. इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के हालात में बदलाव की खबरों ने उम्मीद जगाई है कि आने वाले दिनों में एलपीजी उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है. फिलहाल 19 जून को जारी ताजा दरों के अनुसार दिल्ली से लेकर मुंबई, लखनऊ और पटना तक घरेलू व कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें अलग-अलग स्तर पर बनी हुई हैं.
शहरवार एलपीजी सिलेंडर के ताजा रेट
| शहर | घरेलू सिलेंडर | कमर्शियल सिलेंडर |
|---|---|---|
| दिल्ली | 942.00 रुपये | 3113.50 रुपये |
| मुंबई | 941.50 रुपये | 3067.50 रुपये |
| कोलकाता | 968.00 रुपये | 3256.00 रुपये |
| चेन्नई | 957.50 रुपये | 3283.00 रुपये |
| बेंगलुरु | 944.50 रुपये | 3198.00 रुपये |
| अहमदाबाद | 949.00 रुपये | 3133.00 रुपये |
| लखनऊ | 979.50 रुपये | 3236.00 रुपये |
| भुवनेश्वर | 968.00 रुपये | 3290.50 रुपये |
| पटना | 1031.50 रुपये | 3400.50 रुपये |
आखिर कब मिल सकती है राहत?
घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में हाल के महीनों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. बीते 7 जून को तेल कंपनियों ने कीमत में 29 रुपये का इजाफा किया था. इससे पहले मार्च में भी घरेलू सिलेंडर 60 रुपये महंगा हुआ था. वहीं कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में मई के दौरान 993 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. इसके बाद 1 जून को भी 42 रुपये की वृद्धि कर दी गई. लगातार बढ़ रही कीमतों का असर सीधे तौर पर परिवारों और छोटे कारोबारियों की जेब पर पड़ रहा है. ऐसे में लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर गैस सिलेंडर सस्ता कब होगा. ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते तथा होर्मुज मार्ग के दोबारा खुलने की खबरों के बाद उम्मीदें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन फिलहाल तत्काल राहत मिलने के संकेत नहीं हैं.
तेल कंपनियों को उठाना पड़ रहा भारी नुकसान
पेट्रोलियम मंत्रालय पहले ही साफ कर चुका है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की मौजूदा बिक्री कीमत उसकी वास्तविक लागत से काफी कम है. मंत्रालय के अनुसार एलपीजी के आयात, रिफिलिंग और घर-घर आपूर्ति की कुल लागत करीब 1600 रुपये प्रति सिलेंडर पड़ती है. इसके बावजूद तेल कंपनियां इसे आम उपभोक्ताओं को 942 रुपये के आसपास उपलब्ध करा रही हैं. यही वजह है कि कंपनियों को प्रति सिलेंडर करीब 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. ऐसे में कीमतों में कटौती का फैसला तुरंत लिया जाना आसान नहीं माना जा रहा. अब उपभोक्ताओं की नजर जुलाई में होने वाली अगली समीक्षा बैठक पर टिकी हुई है.
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