जीवन में मुक्ति का अनुभव कराती है श्रीमद्भागवत कथा: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भागवत की कथा केवल सुन लेने की बस्तु नहीं है। वह तो श्रवण के बाद सतत मनन द्वारा हृदय में सुरक्षित रखने एवं आचरण की बस्तु है।
भागवत की कथा मरने के बाद मुक्ति प्रदान करने वाली ही है इतना ही नहीं, बल्कि मृत्यु से पूर्व चलने वाले जीवन में ही मुक्ति का आनन्द अनुभव कराने के लिए है। कथा की विश्रान्ति का समय भी खूब खाकर आराम करने का नहीं, बल्कि सात्विक जीवन जीकर श्रवण के पश्चात मनन करने के लिए है।
कथा सुनने के बाद श्रवण किए गए सिद्धान्तों को सतत मनन करके जीवन में पचाएंगे तो ही कथा का सम्पूर्ण लाभ मिलेगा।  कथा का एक-एक सिद्धान्त मनन द्वारा हृदय में स्थिर हो और कथा में सुना हुआ ज्ञान क्रियात्मक बन जाय, तभी उसकी सार्थकता है।
भागवत में मनाया जाने वाला उत्सव प्रसाद में तन्मय होने के लिए नहीं, प्रभु में तन्मय होने के लिए है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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