World Heart Day: दिल हमारे शरीर का ऐसा अंग है जो हर पल बिना रुके काम करता है. यह लगातार शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाता है. इसलिए दिल की सेहत में होने वाला कोई भी बदलाव पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है. चिंता की बात यह है कि हृदय से जुड़ी समस्या हमेशा अचानक और तेज लक्षणों के साथ सामने आए, ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार शरीर पहले से कुछ ऐसे संकेत देता रहता है, जिन्हें लोग गैस, एसिडिटी, थकान या तनाव समझकर टाल देते हैं. हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है.
इस दिन हृदय रोगों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट अटैक के अलावा कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट फेल्योर और हृदय की धड़कन से जुड़ी समस्याएं भी गंभीर हृदय रोगों में शामिल हैं. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार सीने में असहजता, सांस फूलना, शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द, ठंडा पसीना, मतली और चक्कर जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
सीने में दबाव या भारीपन
हार्ट अटैक का मतलब हमेशा सीने में तेज दर्द होना नहीं है. कई बार सीने के बीच में दबाव, जकड़न, भारीपन, जलन या असहजता महसूस हो सकती है. यह कुछ मिनट तक रह सकती है और फिर ठीक होकर दोबारा भी शुरू हो सकती है. खास बात यह है कि सीने में ऐसी परेशानी को केवल गैस या एसिडिटी मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन भी सीने में दबाव या असहजता को हार्ट अटैक के प्रमुख चेतावनी संकेतों में शामिल करता है.
सामान्य काम में भी सांस फूलना
अगर पहले जिस काम को आसानी से कर लेते थे, उसी काम को करने पर अब ज्यादा सांस फूलने लगी है तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए. खासकर चलते समय, सीढ़ियां चढ़ते समय या सामान्य गतिविधियों के दौरान सांस फूलना हृदय संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है. हार्ट फेल्योर में सांस की परेशानी धीरे-धीरे बढ़ सकती है. कुछ लोगों को लेटने या रात में अचानक सांस लेने में दिक्कत के कारण नींद से उठना भी पड़ सकता है.
बिना वजह लगातार थकान
अगर पर्याप्त आराम के बावजूद रोजमर्रा के सामान्य काम करने में असामान्य थकान महसूस होने लगे, तो इसके कारण को समझना जरूरी है. लगातार कमजोरी या ऊर्जा की कमी को हमेशा नींद की कमी या काम का तनाव मान लेना ठीक नहीं है. विशेष रूप से महिलाओं में असामान्य थकान और कमजोरी हार्ट अटैक के साथ दिखाई देने वाले लक्षणों में शामिल हो सकते हैं.
हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द
दिल से जुड़ी परेशानी का असर केवल सीने तक सीमित नहीं रहता. हार्ट अटैक के दौरान एक या दोनों हाथों, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द या असहजता महसूस हो सकती है. महिलाओं में पीठ, कंधे या जबड़े में दर्द जैसे अपेक्षाकृत कम पहचाने जाने वाले लक्षण भी सामने आ सकते हैं. इसलिए अचानक या असामान्य दर्द को केवल मांसपेशियों की समस्या मानकर छोड़ना उचित नहीं है, खासकर जब इसके साथ दूसरे चेतावनी संकेत भी मौजूद हों.
पैरों और टखनों में लगातार सूजन
पैरों, टखनों या शरीर के दूसरे हिस्सों में लगातार सूजन को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. हार्ट फेल्योर में हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित होने के कारण शरीर में अतिरिक्त तरल जमा हो सकता है, जिससे पैरों और टखनों में सूजन दिखाई दे सकती है. अगर सूजन के साथ सांस फूलना, थकान या वजन में अचानक बढ़ोतरी भी हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है.
चक्कर या सिर हल्का लगना
अचानक चक्कर आना या सिर हल्का महसूस होना कई कारणों से हो सकता है. लेकिन अगर इसके साथ सीने में दबाव, सांस फूलना, पसीना, मतली या कमजोरी जैसे लक्षण भी मौजूद हों, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. ऐसे लक्षण हार्ट अटैक के दौरान भी दिखाई दे सकते हैं.
अचानक ठंडा पसीना आना
बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक ठंडा पसीना आना भी हार्ट अटैक के चेतावनी संकेतों में शामिल है. खासकर अगर पसीने के साथ सीने में दबाव, सांस लेने में परेशानी, मतली या चक्कर जैसी समस्या हो रही हो, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है.
एक लक्षण का मतलब हमेशा दिल की बीमारी नहीं
इनमें से कोई एक लक्षण दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से हृदय रोग है. इन लक्षणों के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं. लेकिन अगर कोई लक्षण नया है, बार-बार हो रहा है, लगातार बढ़ रहा है या कई लक्षण एक साथ दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. हार्ट अटैक का संदेह होने पर इंतजार नहीं करना चाहिए. सीने में दबाव या दर्द के साथ सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर या शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द जैसे लक्षण हों तो तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए.
किन जांचों से पता चलती है समस्या?
लक्षणों के आधार पर डॉक्टर अलग-अलग जांच की सलाह दे सकते हैं. इनमें ईसीजी, रक्त जांच, इकोकार्डियोग्राम, तनाव परीक्षण, सीटी स्कैन या कोरोनरी एंजियोग्राम जैसी जांच शामिल हो सकती हैं. हार्ट अटैक की स्थिति में रक्त जांच और ईसीजी समेत अन्य जांचों से स्थिति का आकलन किया जाता है.
दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
हृदय को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान से दूरी बनाना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना और रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल तथा मधुमेह को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है. साथ ही शरीर में दिखाई देने वाले नए या असामान्य बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना भी जरूरी है.
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