ट्रंप का तुर्की प्रेम: दर्जनों GE-F110 जेट इंजन बेचने की प्रक्रिया शुरू, दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत

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Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तुर्की के साथ एक रक्षा सौदे की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी विदेश विभाग ने कांग्रेस को औपचारिक रूप से सूचना दी है कि वह 70 करोड़ डॉलर से अधिक कीमत के दर्जनों GE-F110 जेट इंजन तुर्की को बेचने की मंजूरी देना चाहता है. अगर कांग्रेस अगले 15 दिनों में इस पर रोक नहीं लगाती, तो यह डील आगे बढ़ जाएगी.

अमेरिका ने तुर्की पर प्रतिबंध लगाए

यह फैसला इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि 2019 में रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के बाद अमेरिका ने तुर्की पर प्रतिबंध लगाए थे और उसे F-35 फाइटर जेट प्रोग्राम से बाहर कर दिया था. ऐसे में वर्षों बाद यह पहला बड़ा रक्षा सौदा है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि तुर्की और अमेरिका की डील इजरायल, रूस और ग्रीस की टेंशन बढ़ाने वाला है.

स्वदेशी लड़ाकू विमान KAAN विकसित

तुर्की लंबे समय से अपना स्वदेशी लड़ाकू विमान KAAN विकसित कर रहा है. यह प्रोजेक्ट 2016 में शुरू हुआ था ताकि भविष्य में तुर्की अमेरिकी F-16 विमानों पर अपनी निर्भरता कम कर सके. अब अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (GE) कंपनी इसी KAAN के शुरुआती संस्करणों के लिए F110 जेट इंजन उपलब्ध कराएगी. यानी अमेरिका फिलहाल तुर्की को कोई नया फाइटर जेट नहीं बेच रहा, बल्कि उसके घर में बने लड़ाकू विमान को उड़ान देने वाला सबसे अहम हिस्सा दे रहा है.

तुर्की को मिलने वाला इंजन GE F110 है

रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इंजन किसी भी लड़ाकू विमान का दिल होता है और उसके बिना पूरा प्रोजेक्ट अधूरा रह जाती है. यह इंजन F-35 में नहीं लगता है. F-35 स्टील्थ फाइटर जेट में Pratt & Whitney F135 इंजन लगाया जाता है, जबकि तुर्की को मिलने वाला इंजन GE F110 है. GE F110 कोई नया इंजन नहीं बल्कि दशकों से युद्ध में परखा हुआ इंजन है. इसका इस्तेमाल दुनिया के कई देशों के F-16 और कुछ F-15 लड़ाकू विमानों में होता है.

आधुनिक लड़ाकू विमान तैयार करने की दिशा में बड़ी छलांग

यही वजह है कि इसे भरोसेमंद और शक्तिशाली इंजन माना जाता है. F110 आफ्टरबर्नर के साथ करीब 29,000 पाउंड का थ्रस्ट देता है. इसके कई आधुनिक वेरिएंट मौजूद हैं और यह लंबे समय से सेवा में है. यानी KAAN को मिलने वाला इंजन उसे F-35 जैसा नहीं बना देगा, लेकिन यह तुर्की के लिए अपने दम पर आधुनिक लड़ाकू विमान तैयार करने की दिशा में बड़ी छलांग जरूर है. इस डील से सबसे ज्यादा चिंता इजरायल को हो सकती है. गाजा युद्ध के बाद तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन लगातार इजरायल की आलोचना करते रहे हैं.

रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में काफी खराब

दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में काफी खराब हुए हैं. अब तक तुर्की की वायुसेना मुख्य रूप से अमेरिकी F-16 विमानों पर निर्भर रही है. अमेरिका चाहे तो इजरायल के साथ पंगा लेने पर तुर्की को स्पेयर पार्ट्स या अपग्रेड रोककर उस पर दबाव बना सकता है. लेकिन KAAN के सफल होने के बाद तुर्की धीरे-धीरे अपने घरेलू लड़ाकू विमान पर निर्भर हो जाएगा. इससे उस पर अमेरिकी राजनीतिक दबाव कम होगा और उसकी सैन्य स्वतंत्रता बढ़ेगी.

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