Pearl Gemstone: इन 5 राशियों के लोग भूलकर भी न पहनें मोती, फायदे की जगह बढ़ सकती हैं परेशानियां

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Pearl Gemstone: खूबसूरत सफेद चमक वाला मोती जूलरी में जितना पसंद किया जाता है, ज्योतिष में भी इसे उतना ही महत्वपूर्ण रत्न माना गया है. कई लोग मानसिक शांति, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन के लिए मोती धारण करते हैं, लेकिन केवल इसके फायदे सुनकर इसे पहन लेना सही नहीं माना जाता. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जो मोती किसी एक व्यक्ति के लिए शुभ साबित हो सकता है,

वही दूसरे के लिए प्रतिकूल परिणाम की वजह भी बन सकता है. यही कारण है कि रत्न धारण करने से पहले राशि के साथ कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा और योग का आकलन जरूरी बताया जाता है. खासतौर पर वृषभ, मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि या लग्न के जातकों को बिना ज्योतिषीय सलाह के मोती पहनने से बचने की सलाह दी जाती है. आइए जानते हैं मोती का संबंध किस ग्रह से है और किन लोगों के लिए इसे शुभ माना गया है.

चंद्रमा का रत्न माना जाता है मोती

ज्योतिष शास्त्र में मोती को चंद्रमा का प्रतिनिधि रत्न माना गया है. चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है. मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो, उनके लिए उचित ज्योतिषीय आकलन के बाद मोती धारण करना लाभकारी हो सकता है.

ऐसा माना जाता है कि सही व्यक्ति द्वारा मोती पहनने से मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा मिल सकता है. इसके साथ ही आत्मविश्वास में भी सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है. हालांकि कमजोर चंद्रमा का अर्थ हर स्थिति में सीधे मोती पहन लेना नहीं होता, क्योंकि कुंडली के दूसरे ग्रहों की स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है.

इन 5 राशियों के लोग बिना सलाह न पहनें मोती

ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, हर व्यक्ति के लिए मोती अनुकूल नहीं होता. जिन लोगों की कुंडली में शुक्र, बुध या शनि का प्रभाव अधिक हो, उन्हें यह रत्न हर परिस्थिति में सूट करे, ऐसा जरूरी नहीं माना जाता. खासतौर पर वृषभ, मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि या लग्न के जातकों को बिना कुंडली का विश्लेषण कराए मोती धारण नहीं करना चाहिए. ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, इन लोगों के लिए रत्न का फैसला केवल राशि देखकर करने के बजाय ग्रहों की वास्तविक स्थिति और चल रही दशाओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए.

गलत रत्न पहनने से क्यों बचना चाहिए?

रत्नों को ज्योतिष में ग्रहों की ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में किसी ग्रह से संबंधित रत्न धारण करने का उद्देश्य उसके प्रभाव को मजबूत करना माना जाता है. यही वजह है कि बिना यह समझे कि संबंधित ग्रह कुंडली में किस स्थिति में है, रत्न पहनने की सलाह नहीं दी जाती. कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा और विशेष योग अलग-अलग व्यक्ति के लिए अलग परिणाम दे सकते हैं. इसलिए एक ही राशि के दो लोगों पर भी मोती का प्रभाव समान हो, यह जरूरी नहीं माना जाता.

इन रत्नों के साथ मोती पहनना नहीं माना जाता उचित

मोती धारण करते समय दूसरे रत्नों के मेल का भी ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मोती को हीरा, पन्ना, नीलम और गोमेद के साथ पहनना उचित नहीं माना गया है. वहीं, पुखराज और मूंगा के साथ मोती का संयोजन शुभ बताया जाता है. मान्यता है कि सही ग्रह स्थिति में इन रत्नों का मेल सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बढ़ा सकता है. हालांकि यहां भी व्यक्ति की कुंडली को प्राथमिक आधार माना जाता है.

किन राशियों के लिए शुभ माना जाता है मोती?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि या लग्न वाले लोगों के लिए मोती शुभ माना गया है. माना जाता है कि अनुकूल स्थिति में इसे धारण करने से मानसिक स्थिरता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिल सकता है. वहीं, सिंह, तुला और धनु लग्न के जातक भी कुछ विशेष परिस्थितियों में मोती पहन सकते हैं. हालांकि इनके लिए भी अंतिम फैसला केवल राशि या लग्न के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी कुंडली के विश्लेषण के बाद लेने की सलाह दी जाती है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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