पुरुषों के मुकाबले क्यों महिलाओं कोअधिक होता है हीटवेव का खतरा ? जानें इसकी असली वजह

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Heatwave Risk for Women: इस समय चिलचिलाती गर्मी हर किसी के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है. इससे बचने के लिए ज्यादातर लोग फ्रिज का पानी और पंखे-कूलर का सहारा ले रहे है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह तपती गर्मी और लू महिलाओं के लिए केवल एक असुविधा नहीं है, बल्कि उनकी सेहत के लिए एक बड़ा खतरा है?

​दरअसल, आमतौर पर जब भी भीषण गर्मी या लू की बात होती है, तो हमारा पूरा ध्यान छोटे बच्चों या बहुत बुजुर्ग लोगों पर होता है. लेकिन इस बातचीत में एक बहुत जरूरी बात छूट जाती है वह है महिला और पुरुष के शरीर का फर्क. दरअसल,  महिलाओं की बायोलॉजी, उनके हार्मोन्स और उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी कुछ ऐसी होती है, जो एक तपती दोपहर को उनके लिए बगल में बैठे किसी पुरुष के मुकाबले कहीं ज्यादा खतरनाक बना देती है. ऐसे में चलिए जानते है खुद को सेहतमंद रखने और हीटवेव से बचने के बारे में विस्तार से….

कौन लोग होते हैं ज्यादा प्रभावित?

बता दें कि छोटे बच्चे, बुजुर्ग और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोग गर्मी में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. इनके शरीर का तापमान जल्दी बिगड़ता है और इनका मन भी जल्दी अस्थिर हो जाता है. इसके अलावा यदि किसी को पहले से घबराहट या चिंता की शिकायत है तो गर्मी उसे और बढ़ा देती है.

राहत पाने के लिए करें ये उपाय

  • पानी खूब पिएं: शरीर में पानी की कमी से थकावट और चक्कर आ सकते हैं, जो घबराहट को बढ़ाते हैं.
  • ठंडी और हल्की चीजें खाएं: ताजगी देने वाले फल, सलाद और नींबू पानी जैसी चीजें फायदेमंद होती हैं.
  • नींद पूरी लें: दिन भर की थकावट और गर्मी की वजह से रात में गहरी नींद लेना जरूरी है.
  • धूप से बचें: दोपहर में बाहर निकलने से बचें, खासकर जब सूरज सिर पर हो.
  • मन शांत रखने की कोशिश करें: ध्यान, प्राणायाम या धीमी रफ्तार वाली सैर आपके मन को शांत करने में मदद कर सकती है.

क्यों महिलाएं को होता है हीटवेव का अधिक खतरा 

कम पसीना आना- 

​पसीना आना हमारे शरीर का अपना ‘कूलर सिस्टम’ है. जब बाहर गर्मी बढ़ती है, तो शरीर से पसीना निकलता है. यह पसीना जब हवा में उड़ता है, तो हमारे शरीर को ठंडक मिलती है. लेकिन रिसर्च के मुताबिक, महिलाओं के शरीर में पुरुषो के मुकाबले कम पसीना बनता है. यही नहीं, महिलाओं के शरीर को पसीना बाहर निकालने के लिए पुरुषों से ज्यादा अंदरूनी तापमान की जरूरत होती है. इसका मतलब यह हुआ कि गर्मी लगने पर महिलाओं का कूलिंग सिस्टम देर से शुरू होता है और कम रफ्तार से काम करता है. इसलिए उनके लिए खुद को ठंडा रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है.

पीरियड्स और हार्मोन्स- 

इसके अलावा, ​महिलाओं का अंदरूनी तापमान हमेशा एक जैसा नहीं रहता. पीरियड्स साइकल के दूसरे हिस्से में, यानी ओव्यूलेशन के बाद, महिलाओं के शरीर का अंदरूनी तापमान करीब आधा डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, जिससे  महिलाएं महीने के दिनों में ज्यादा गर्मी महसूस करती हैं. आम दिनों में तो यह आधा डिग्री का फर्क पता नहीं चलता, लेकिन जब बाहर पहले से ही 42-43 डिग्री तापमान हो, तो शरीर के अंदर की यह एक्स्ट्रा गर्मी महिलाओं की परेशानी को बहुत ज्यादा बढ़ा देती है.

दिल का तेजी से धड़कना 

​जब शरीर को खुद को ठंडा रखना होता है, तो वह खून को स्किन की तरफ तेजी से पंप करता है ताकि गर्मी बाहर निकल सके.वहीं, हीटवेव के दौरान इस काम को करने के लिए महिलाओं का दिल पुरुषों के मुकाबले ज्यादा तेजी से धड़कने लगता है, ऐसे में दिल और पूरे ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है. गर्मी जितनी लंबी खिंचेगी, यह खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा, खासकर उन महिलाओं के लिए जिन्हें पहले से दिल की कोई बीमारी है.

प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज- 

महिलाओं का शरीर बहुत बड़े बदलावों से गुजरता है प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज. इन दोनों ही समय में शरीर के अंदर हार्मोन्स का उतार-चढ़ाव चरम पर होता है. प्रेग्नेंसी में शरीर को दो जान के लिए काम करना पड़ता है, जिससे गर्मी का असर बढ़ जाता है. वहीं मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को ‘हॉट फ्लैशेस’ की समस्या होती है. ऐसे में बाहर की लू उनकी इस तकलीफ को दोगुना कर देती है.

दवाइयां- 

​पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को कुछ ऐसी दवाइयो का भी सेवन करना पड़ता है जो शरीर के तापमान को कंट्रोल करने की क्षमता को बिगाड़ देती हैं. जैसे डिप्रेशन या एंग्जायटी की दवाइयां, एलर्जी की दवाइयां, और ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं. इनमें से कुछ दवाएं पसीना आने की क्षमता को कम कर देती हैं, तो कुछ शरीर से पानी को तेजी से बाहर निकालती हैं. नतीजा यह होता है कि महिलाएं बिना प्यास लगे ही बहुत जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाती हैं और उनका शरीर अंदर से गर्म होने लगता है.

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