New Delhi: अफगानिस्तान की तालिबानी शासन ने पाकिस्तान की चिंता एक बार फिर बढा दी है. तालिबान अब नई दिल्ली में पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपना बड़ा कार्यक्रम करने जा रहा है. 17 अगस्त को तालिबान के दिल्ली स्थित प्रभारी राजनयिक नूर अहमद नूर ‘विक्ट्री डे’ यानी विजय दिवस के मौके पर स्वागत समारोह आयोजित करेंगे. कार्यक्रम में राजनयिकों, समाज के प्रमुख लोगों, अफगान समुदाय और मीडिया के शामिल होने की उम्मीद है.
जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं
भारत सरकार की ओर से भी प्रतिनिधित्व होने की संभावना है, हालांकि इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है. अगस्त 2021 में अशरफ गनी सरकार के पतन के बाद नई दिल्ली में तालिबान की ओर से आयोजित यह पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम होगा. कार्यक्रम को लेकर इसलिए भी नजरें रहेंगी कि वहां राजनयिक प्रतीकों और अफगान झंडे का किस तरह इस्तेमाल किया जाता है.
तालिबान को औपचारिक तौर पर मान्यता नहीं
भारत समेत ज्यादातर देश तालिबान सरकार को औपचारिक तौर पर मान्यता नहीं देते हैं. ऐसे में दिल्ली में तालिबान के इस सार्वजनिक कार्यक्रम को दोनों पक्षों के बीच बढ़ते संपर्क के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. तालिबानी सरकार की ओर से नियुक्त चार्ज डी अफेयर्स नूर अहमद नूर तालिबान की ओर से नई दिल्ली में नियुक्त पहले अधिकारी हैं. वह जनवरी में भारत पहुंचे थे और इसके बाद विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ कई मुलाकातें कर चुके हैं.
अक्टूबर का एक दौरा भी अहम
भारत और तालिबान के बीच बढ़ते संपर्क में पिछले साल अक्टूबर का एक दौरा भी अहम रहा. नूर अहमद नूर उस तालिबानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जो विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी के साथ भारत आया था. यह किसी वरिष्ठ तालिबानी अधिकारी की भारत की पहली यात्रा थी. भारत काबुल में अपने तकनीकी मिशन को पूर्ण दूतावास में बदल चुका है. भारत ने कहा था कि यह कदम अफगानिस्तान के साथ द्विपक्षीय संपर्क को और मजबूत करने के उसके संकल्प को दिखाता है.
अफगान वाणिज्य दूतावासों की जिम्मेदारी
पिछले कुछ महीनों में तालिबान के तीन और मंत्री भारत आ चुके हैं. उद्योग मंत्री नूरुद्दीन अजीजी नवंबर 2025 में, स्वास्थ्य मंत्री नूर जलाल जलाली दिसंबर 2025 में और कृषि मंत्री अताउल्लाह ओमारी इसी साल जुलाई में भारत आए. तालिबान के अधिकारी मुंबई और हैदराबाद स्थित अफगान वाणिज्य दूतावासों की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.
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