Kathmandu: नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन की वजह से चारों तरफ सिर्फ तबाही और दर्दनाक मंजर दिखाई दे रहा है. संकट की इस भीषण घड़ी में नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में देश को संबोधित किया. अपने संबोधन में उन्होंने भावुक होते हुए भारत और चीन द्वारा भेजी गई समय पर मदद के लिए दोनों पड़ोसी देशों का खुलकर धन्यवाद किया और आभार जताया.
मना करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि इतनी बड़ी और भयानक राष्ट्रीय आपदा के समय अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से मना करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता था. उन्होंने कहा कि जब पूरा देश पानी में डूब रहा था और रास्ते बंद हो चुके थे, तब नेपाल सरकार ने तुरंत मित्र राष्ट्रों और प्राइवेट सेक्टर के साथ तालमेल बिठाकर राहत और बचाव का काम शुरू किया.
तकनीशियनों ने शुरू कर दी हवाई सर्वेक्षण
संसद में अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि हमारे दोनों पड़ोसी और मित्र देश, भारत और चीन ने आपदा की खबर मिलते ही अपने एक्सपर्ट्स और तकनीशियनों को नेपाल भेज दिया था. दुर्घटना वाले पहले ही दिन से इन तकनीशियनों ने हवाई सर्वेक्षण शुरू कर दी थी. उन्होंने आसमान से ही तबाही के दायरे का सही अंदाजा लगाया और ये रास्ता खोजा कि बेहद दुर्गम इलाकों तक रेस्क्यू टीमें कैसे पहुंच सकती हैं’.
भारतीय टीमों के काम की जमकर तारीफ
आपदा के खौफनाक हालात बयां करते हुए बालेन शाह ने भारतीय और चीनी टीमों के काम की जमकर तारीफ की. उन्होंने बताया कि किस तरह भारतीय तकनीशियनों ने अपनी जान की परवाह किए बिना सबसे खतरनाक और दूरदराज के इलाकों में पहुंचकर लोगों की जान बचाई. शाह ने संसद को बताया कि ये कोई आम बाढ़ नहीं थी, बल्कि एक बेहद असाधारण और जानलेवा स्थिति थी.
पैर टिकाने तक की जगह नहीं बची
तबाही वाले इलाकों में भारी कीचड़, मलबा और पत्थरों का ऐसा ढेर लगा हुआ था कि वहां खुदाई करने वाली भारी मशीनें तो दूर की बात, नेपाल आर्मी और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के लिए अपने पैर टिकाने तक की जगह नहीं बची थी. ऐसे हालात में भी भारतीय एक्सपर्ट्स ने आधुनिक उपकरणों के दम पर राहत काम को आगे बढ़ाया. नेपाल में अचानक आई इस फ्लैश फ्लड ने सब कुछ तबाह कर दिया है. ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश भर में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 तक पहुंच गई है.
लापता लोगों को ढूंढने की कोशिश
हादसा हुए एक हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन राहत और बचाव दल अब भी समय से होड़ लगाते हुए मलबे में दबे और लापता लोगों को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं. नेपाली सुरक्षा बलों, सेना और अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमों ने मिलकर अब तक 6,541 लोगों को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला है. लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि 4,858 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में दिन-रात एक किया जा रहा है. जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, अपनों की आस लगाए बैठे परिवारों का सब्र टूटता जा रहा है.
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