Ebola Outbreak: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में फैले इबोला प्रकोप को लेकर सरकार ने राहत की खबर दी है. सरकार के मुताबिक देश में जारी इबोला का 17वां प्रकोप अब नियंत्रण में है और अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह की शुरुआत में यह अपने चरम स्तर को पार कर चुका था. हालांकि, संक्रमण का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. स्थानीय स्तर पर नए मामले सामने आने और बीमारी के सातवें प्रांत तक पहुंचने के कारण अधिकारियों ने सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया है. सरकार के प्रवक्ता पैट्रिक मुयाया ने शुक्रवार को कैबिनेट बैठक की रिपोर्ट पेश करते हुए स्वास्थ्य मंत्री रोजर कंबा के हवाले से बताया कि इबोला का मौजूदा प्रकोप काबू में है और अगस्त के तीसरे सप्ताह की शुरुआत में यह अपने पीक पर पहुंच गया था.
कई इलाकों में नए मामलों में आई कमी
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, डीआरसी सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति में प्रमुख संकेतक मामलों में कमी की ओर इशारा कर रहे हैं. प्रकोप के हालिया विस्तार से पहले प्रभावित रहे 10 स्वास्थ्य क्षेत्रों में पिछले कम से कम 21 दिनों से कोई नया मामला सामने नहीं आया है. वहीं, प्रकोप के केंद्र माने जा रहे पूर्वी प्रांत इटुरी के कई इलाकों में भी संक्रमण की रफ्तार धीमी हुई है. इसके बावजूद सरकार ने निगरानी में किसी तरह की ढिलाई न बरतने की बात कही है.
कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर जोर
अधिकारियों ने लगातार सतर्कता बनाए रखने और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को सख्ती से जारी रखने को कहा है. खासतौर पर उन इलाकों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई गई है, जहां हाल के दिनों में संक्रमण के मामले बढ़े हैं. कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के तहत संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की पहचान की जाती है, ताकि संक्रमण के संभावित प्रसार पर नजर रखी जा सके.
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने आकलन पर जताई सावधानी
कांगो के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और मौजूदा सांसद जीन-जैक्स मबुंगानी मबांडा ने सरकार के आकलन को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है. उन्होंने शनिवार को कहा कि कुछ इलाकों में मामलों की संख्या कम होने का मतलब यह नहीं माना जाना चाहिए कि हर जगह संक्रमण पर काबू पा लिया गया है. उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकोप में, जहां संक्रमण कई अलग-अलग जगहों से फैल रहा हो, अलग-अलग इलाके अलग-अलग समय पर अपने चरम स्तर पर पहुंच सकते हैं.
मबांडा ने यह भी कहा कि महामारी का ग्राफ यानी एपिडेमिक कर्व केवल पहचाने गए मामलों को दर्शाता है. ऐसे में समुदायों में मौजूद उन संक्रमणों का असर भी हो सकता है, जिनकी अभी पहचान नहीं हो पाई है.
WHO ने प्रकोप को बताया अभी भी अनियंत्रित
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंगलवार को जारी अपनी नवीनतम साप्ताहिक रिपोर्ट में कहा कि इबोला का यह प्रकोप अभी भी अनियंत्रित और हेटरोजीनस बना हुआ है. WHO के अनुसार कुछ इलाकों में संक्रमण के मामले कम हो रहे हैं, जबकि दूसरे क्षेत्रों में मामले बढ़ रहे हैं या संक्रमण भौगोलिक रूप से नए क्षेत्रों तक पहुंच रहा है. संगठन ने कहा कि यह प्रकोप एक समान तरीके से कम होने के बजाय अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग रुख दिखा रहा है.
सातवें प्रांत तक पहुंचा इबोला
डीआरसी सरकार ने गुरुवार को उत्तर-पश्चिमी प्रांत सुद-उबांगी में इबोला के पहले मामले की पुष्टि की. इसके साथ ही यह बीमारी देश के सातवें प्रांत तक पहुंच गई है. सुद-उबांगी की सीमा उन छह प्रांतों में से किसी से नहीं लगती है, जहां इससे पहले इबोला के मामलों की पुष्टि हुई थी. जीन-जैक्स मबांडा के अनुसार, सुद-उबांगी में संक्रमित पाया गया 23 वर्षीय मरीज बाद में मौत का शिकार हो गया. बताया गया कि सुद-उबांगी पहुंचने से पहले उसने काफी यात्रा की थी. मबांडा के मुताबिक, मरीज ने कई प्रांतों के अलावा पड़ोसी देशों रवांडा और युगांडा की भी यात्रा की थी. उसकी यात्रा में सड़क और नदी, दोनों रास्तों का इस्तेमाल शामिल था.
10 सितंबर तक 7,022 कन्फर्म मामले
आंकड़ों के मुताबिक, 10 सितंबर तक डीआरसी में इबोला के 7,022 कन्फर्म मामले दर्ज किए गए थे. इनमें 3,398 लोगों की मौत हो चुकी थी. इस आधार पर मृत्यु दर 48.4 प्रतिशत रही. इबोला का संक्रमण अब देश के सात प्रांतों के 62 हेल्थ जोन तक फैल चुका है. मई में घोषित किया गया मौजूदा इबोला प्रकोप डीआरसी के इतिहास में इस बीमारी का सबसे बड़ा और सबसे घातक प्रकोप बन गया है. यह दुनिया में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप भी है. इससे बड़ा प्रकोप वर्ष 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में फैला था.
यह भी पढ़े: Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी कल, जानिए गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त

