Saudi Arab: सऊदी अरब के मदीना में यूरेनियम और अन्य दुर्लभ खनिजों वाले 110 मिलियन टन कच्चे माल की जानकारी मिली है. ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने वियना में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के जनरल कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि देश ने मदीना के जबल सय्यद प्रोजेक्ट में यूरेनियम वाला 110 मिलियन टन से अधिक कच्चा माल खोजा है.
बता दें कि सऊदी का यह ऐलान जुलाई 2026 में अमेरिका के साथ सिविल न्यूक्लियर सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर होने के कुछ ही महीनों बाद किया गया है. सऊदी मीडिया ने बताया कि “मदीना में जबल सायद प्रोजेक्ट में खोज और भूवैज्ञानिक स्टडीज से पता चला है कि वहां लगभग 110 मिलियन टन अयस्क के संसाधन मौजूद हैं. इनमें दुर्लभ खनिज और यूरेनियम अच्छी मात्रा में पाए गए हैं.”
सऊदी के लिए बेहद अहम यूरेनियम से जुड़ा यह ऐलान
क्या सऊदी अरब परमाणु बम बना सकता है?
बता दें कि जमीन के नीचे यूरेनियम का होना ही काफी नहीं है, इसे पहले निकालना (माइनिंग), प्रोसेस करना और फिर एनरिच (संवर्धित) करना पड़ता है. कम एनरिच किए गए यूरेनियम का इस्तेमाल आम न्यूक्लियर रिएक्टरों में ईंधन के तौर पर किया जा सकता है, जबकि बहुत अधिक एनरिचमेंट लेवल से परमाणु हथियार के लिए जरूरी मटीरियल बनाया जा सकता है.
दरअसल, सऊदी अरब का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कामों के लिए है और वह ‘न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी’ का सदस्य है, जो उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकती है. हालांकि, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पहले ही साफ कर दिया है कि किस स्थिति में यह रुख बदल सकता है. उन्होंने 2018 में कहा था, “इसमें कोई शक नहीं कि अगर ईरान परमाणु बम बनाता है, तो हम भी जल्द से जल्द वैसा ही करेंगे.”

