‘उर्दू मुसलमानों की नहीं, हिंदुस्तान की जुबान है’, भारत एक्सप्रेस के बज़्म-ए-सहाफ़त में बोले शहनवाज हुसैन

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Bharat Express Bazm e Sahafat: दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में ‘भारत एक्सप्रेस उर्दू’ का तीसरा राष्ट्रीय कॉन्क्लेव ‘बज़्म-ए-सहाफ़त’ आयोजित हुआ. इस मौके पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने शिरकत की और उर्दू, पत्रकारिता और नई तकनीक पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि अब लोग अखबारों और मैगजीन की जगह मोबाइल और इंटरनेट पर खबरें पढ़ते हैं. कोरोना के बाद अखबार पढ़ने की आदत और भी कम हो गई. यहां तक कि बड़े सर्कुलेशन वाले इंग्लिश वीकली भी अब ऑनलाइन पढ़े जाते हैं.

उर्दू की अहमियत पर क्या कहा?

शहनवाज हुसैन ने कहा कि उर्दू को अक्सर मुसलमानों की जुबान समझा जाता है, जबकि यह साझा तहज़ीब की भाषा है. संसद में भी उर्दू के शेर और इशार सुनाए जाते हैं. उन्होंने माना कि उर्दू का फ़रोग अभी बाकी है और इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है.

दक्षिण भारत के लोग पढ़ते हैं उर्दू के इशारे

उन्होंने बताया कि वे तीन बार लोकसभा के सदस्य रहे हैं और जनसंघ से बीजेपी तक लगातार जीतकर संसद पहुंचे. उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के लोग भी उर्दू के इशार पढ़ते हैं और यह भाषा पूरे देश में सम्मान पाती है.

एनसीपीएल के योगदान को किया याद

उन्होंने याद किया कि जब वे मंत्री थे, तब एनसीपीएल ने सुपौल जैसे दूरदराज इलाकों में भी उर्दू सेंटर खोले थे. आज भी वे सेंटर चल रहे हैं और उर्दू के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं.

पीएम के जन्मदिन पर क्या बोले हुसैन?

कार्यक्रम का दिन खास था क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी था. शहनवाज हुसैन ने कहा कि पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री रहते हुए 25 साल पूरे किए हैं. उन्होंने इसे जनता की दुआ और अल्लाह की मर्जी का नतीजा बताया.

चैटजीपीटी और एआई पर क्या कहा?

उन्होंने कहा कि आज चै जीपीटी और एआई का जमाना है. अब किसी बड़े उस्ताद की जरूरत नहीं, एआई से भी उर्दू का फ़रोग किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि अब वे शेर और इशार पाने के लिए दोस्तों को फोन नहीं करते, बल्कि चैटजीपीटी से तुरंत असरदार अल्फाज़ मिल जाते हैं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भी एआई की मदद से उर्दू के बेहतरीन शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं. कई बार श्रद्धांजलि संदेश भी एआई से बेहतर तरीके से तैयार हो जाते हैं.

दसवीं तक उर्दू पढ़ना अनिवार्य-शहनवाज

शहनवाज ने कहा कि बिहार जैसे राज्यों में दसवीं तक उर्दू पढ़ना अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि उर्दू को मजहब से जोड़कर नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे एक इंटेलेक्चुअल भाषा मानना चाहिए.

दसवीं तक उर्दू पढ़ना अनिवार्य-हुसैन

उन्होंने दसवीं तक उर्दू पढ़ना अनिवार्यदिया कि वे अपनी बातों को सिर्फ खबरों तक सीमित न रखें, बल्कि रील्स और डिजिटल कंटेंट के जरिए दूर तक पहुंचाएं. इससे उर्दू और पत्रकारिता दोनों का विस्तार होगा.

एडिटर्स को क्या दिए सुझाव?

उन्होंने एडिटर्स को सुझाव दिया कि वे अपनी बातों को सिर्फ खबरों तक सीमित न रखें, बल्कि रील्स और डिजिटल कंटेंट के जरिए दूर तक पहुंचाएं। इससे उर्दू और पत्रकारिता दोनों का विस्तार होगा. बज्म-ए-सहाफत का यह आयोजन उर्दू की अहमियत, मीडिया की बदलती आदतों और तकनीक के नए दौर पर गहन चर्चा का मंच बना. शहनवाज हुसैन ने उर्दू को आगे बढ़ाने, पत्रकारिता को डिजिटल माध्यमों से मजबूत करने और नई पीढ़ी को भाषा से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया.

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