आंखें खुली और शरीर सुन्न…सोते समय क्यों लॉक हो जाता है शरीर, जानिए क्या है स्लीप पैरालिसिस

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Sleep Paralysis: सोचिए किसी रात में आपकी आंख खुले और आपको कमरे के आसपास की सभी चीजें महसूस हो, लेकिन आपके हाथ-पैर और शरीर का कोई भी हिस्सा हिल न पाए, तो यह अनुभव आपके लिए डरावना हो सकता है. हालांकि ऐसे में कई लोग भूत-प्रेत या तंत्र-मंत्र मान लेते हैं, जबकि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण होता है. इस स्थिति को मेडिकल साइंस में स्लीप पैरालिसिस के नाम से जाना जाता है, इसमें दिमाग जानने की स्थिति में पहुंच जाता है, लेकिन शरीर नींद के चरण (REM Sleep) से जुड़ा होता है, जिसमें मांसपेशियों की गतिविधि स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है.

कुछ लोगों को इस दौरान कमरे में किसी की मौजूदगी भी महसूस होने, आवाजें सुनाई देने या अजीब आकृतियां दिखाई देने जैसी डरावना अनुभव भी हो सकता हैं. हालांकि ज्यादातर मामलों में यह स्थिति अस्थायी होती है. लेकिन यह समझना जरूरी है कि स्लीप पैरालिसिस होता क्या है? तो देर किस बात की चलिए जानते है…

स्लीप पैरालिसिस क्या होता है?

स्लीप पैरालिसिस को हिंदी में नींद का लकवा या नींद के दौरान अस्थायी अटैक कहा जाता है. इसमें व्यक्ति सोते समय या नींद से जागते समय कुछ समय के लिए अपने शरीर को हिला या बोल नहीं पाता, लेकिन व्यक्ति को अक्सर आसपास की चीजों का एहसास रहता है.

एनसीबीआई के अनुसार, इसे REM sleep और जागने की अवस्था के बीच एक अस्थायी ओवरलैप माना जाता है.  REM- Rapid Eye Movement Sleep यह वह चरण है जिसमें सपने अधिक स्पष्ट रूप से आते हैं. इस दौरान शरीर की अधिकांश मांसपेशियां में अस्थायी शिथिलता होती है, यानी मांसपेशियां जानबूझकर कम सक्रिय रहती हैं. सामान्य स्थिति में जागने पर यह प्रक्रिया खत्म हो जाती है, लेकिन स्लीप पैरालिसिस में कुछ समय के लिए मसल्स पैरालिसिस जागने की अवस्था तक बनी रह सकती है.

सोते या जागते समय क्यों “Lock” हो जाता है शरीर?

कभी-कभी दिमाग जागने की स्थिति में अपेक्षाकृत जल्दी पहुंच जाता है, जबकि यह मसल्स में शिथिलता कुछ समय तक बनी रहती है. परिणामस्वरूप व्यक्ति को लगता है कि मैं जाग गया हूं, लेकिन शरीर मेरा साथ नहीं दे रहा. यही स्लीप पैरालिसिस का मुख्य अनुभव है. आमतौर पर यह स्थिति कुछ सेकंड से कुछ मिनट तक रहती है और अधिकांश मामलों में अपने आप समाप्त हो जाती है. स्लीप पैरालिसिस के दौरान सांस लेने की प्रक्रिया सामान्य रूप से जारी रहती है, हालांकि व्यक्ति को सीने पर दबाव या सांस न ले पाने जैसा डरावना एहसास हो सकता है.

स्लीप पैरालिसिस को ट्रिगर कर सकती हैं ये चीजें?

  • नींद की कमी- लगातार कम सोना स्लीप पैरालिसिस का एक महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर माना जाता है. जब व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं लेता है, तो स्लीप-वेक साइकिल प्रभावित हो सकता है और REM स्लीप से जुड़े ट्रांजिशन में बदलाव आ सकता है.
  • सोने जागने का समय निर्धारित न होना – अगर आपका सोने और उठने का समय लगातार बदलता रहता है, जैसे कभी देर रात तक जागना, कभी सुबह जल्दी उठना या नाइट शिफ्ट करना तो बॉडी क्लॉक और नींद की संरचना प्रभावित हो सकती हैं.
  • तनाव और मानसिक दबाव – लगातार तनाव भी स्लीप पैरालिसिस के एपिसोड को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हो सकता है. तनाव के दौरान नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है और रात में बार-बार नींद न आने की समस्या भी हो सकती है.
  • चिंता – चिंता और स्लीप पैरालिसिस के बीच भी संबंध देखा गया है. यदि कोई व्यक्ति पहले से अधिक चिंता का सामना कर रहा है, तो उसकी नींद की निरंतरता और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है.
  • कुछ नींद संबंधी विकार – कुछ लोगों में स्लीप पैरालिसिस और नींद की समस्या भी देखी जा सकती है। इनमें नार्कोलेप्सी, नींद में खलल और कुछ अन्य नींद संबंधी विकार शामिल हो सकते हैं.

 

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