Cancer Medicine Price: केंद्र सरकार ने कैंसर मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है. सरकार ने 137 गैर-अनुसूचित (नॉन-शेड्यूल्ड) कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन (टीएमआर) लागू किया है. इसके तहत कई दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में 70 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है. दवाओं की संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी. यह फैसला रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत काम करने वाले राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने लिया है. इसका उद्देश्य कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों को कम करना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को घटाना है.
137 कैंसर रोधी दवाओं पर लागू होगा नया नियम
एनपीपीए ने 17 अक्टूबर 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के जरिए इन दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य के 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है. यह कदम औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के अनुच्छेद 19 के तहत उठाया गया है. सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से कैंसर की दवाएं पहले के मुकाबले अधिक किफायती होंगी. हालांकि, कीमतों में वास्तविक कमी अलग-अलग दवाओं और उनके मौजूदा मूल्य के आधार पर अलग हो सकती है.
पहले भी कम की गई थीं कैंसर की दवाओं की कीमतें
एनपीपीए ने वर्ष 2019 में भी टीएमआर के तहत एक पायलट अभ्यास किया था. उस दौरान 42 कैंसर रोधी दवाओं के व्यापार मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया था. इसके बाद गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं के 526 ब्रांडों के अधिकतम खुदरा मूल्य में 90 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई थी.
अब इसी व्यवस्था का विस्तार करते हुए 137 कैंसर रोधी दवाओं को इसके दायरे में लाया गया है. इन दवाओं की सूची स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के तहत गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार की गई है. समिति में देशभर के अस्पतालों के कैंसर विशेषज्ञ, चिकित्सा विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी शामिल थे. जरूरत के अनुसार इस सूची को समय-समय पर अपडेट भी किया जाएगा.
9 नवंबर से कम कीमत पर बेचनी होंगी दवाएं
एनपीपीए के निर्देशों के मुताबिक, राजपत्र अधिसूचना प्रकाशित होने के सात दिनों के भीतर सभी संबंधित दवा निर्माताओं को संशोधित कीमतों की जानकारी प्राधिकरण को देनी होगी. इसके अलावा, कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर नई मूल्य सूची प्रदर्शित करनी होगी और इसे खुदरा विक्रेताओं तथा अस्पतालों तक पहुंचाना होगा. 9 नवंबर 2026 से खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को संशोधित कीमतों पर ही संबंधित दवाएं बेचनी होंगी. उन्हें अपनी फार्मेसी में भी नई कीमतों की सूची प्रदर्शित करनी होगी. अस्पतालों को अपनी वेबसाइट पर संशोधित मूल्य प्रमुखता से दिखाने होंगे.
कहां चेक कर सकेंगे दवाओं के नए रेट?
कैंसर रोधी दवाओं की संशोधित कीमतों की जानकारी उपभोक्ता फार्मा सही दाम ऐप और एनपीपीए की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए प्राप्त कर सकेंगे. इससे मरीजों और उनके परिवारों को दवाओं की कीमतों की जानकारी हासिल करने और निर्धारित मूल्य के अनुसार खरीदारी करने में मदद मिलेगी.
अस्पतालों और राज्य औषधि नियंत्रकों की भी होगी जिम्मेदारी
कैंसर रोधी दवाओं की बड़ी मात्रा सीधे अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को आपूर्ति की जाती है. ऐसे में अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों की जिम्मेदारी होगी कि 9 नवंबर से संबंधित दवाएं संशोधित कीमतों पर ही उपलब्ध कराई जाएं. वहीं, राज्य औषधि नियंत्रक निर्माताओं, दवा वितरकों, खुदरा विक्रेताओं, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के स्तर पर नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे.
दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर
सरकार का उद्देश्य केवल कैंसर की दवाओं की कीमतें कम करना ही नहीं, बल्कि उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है. टीएमआर व्यवस्था के जरिए वितरण और खुदरा बिक्री के दौरान अत्यधिक व्यापार मार्जिन पर नियंत्रण लगाने, निर्माताओं के वैध राजस्व की रक्षा करने और बाजार में कृत्रिम कमी को रोकने का प्रयास किया जाएगा.
दवा कंपनियों को अधिसूचित दवाओं के मौजूदा उत्पादन और आपूर्ति का स्तर बनाए रखना होगा, ताकि मरीजों को समय पर दवाएं मिलती रहें और इलाज में किसी तरह की बाधा न आए. कैंसर का इलाज लंबे समय तक चलने के कारण कई परिवारों को भारी आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है. ऐसे में 137 कैंसर रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित करने का यह फैसला मरीजों के खर्च को कम करने और उन्हें अधिक किफायती इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

