डोनाल्ड ट्रंप ने जाहिर की तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की इच्छा, आखिर क्या है उनके रास्ते का रोड़ा?

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है. आयोवा में एक रैली के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने पहले माना कि अमेरिकी कानून उन्हें दोबारा चुनाव लड़ने से रोकता है, लेकिन फिर साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में कथित धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास फिर से चुनाव लड़ने का अधिकार है, क्योंकि वह दूसरी बार जीते थे, लेकिन धांधली करके हटा दिया गया.

डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, उनका दूसरा कार्यकाल वास्तव में तीसरा कार्यकाल है और उनके मुताबिक जब वह तीसरी बार राष्ट्रपति बन ही गए हैं तो चौथी बार भी चुनाव लड़ा जा सकता है. ऐसे में सवाल है कि यदि ट्रंप तीसरी बार राष्ट्रपति बनना चाहते हैं, तो अमेरिकी संविधान इसकी इजाजत क्यों नहीं देता और उनके ताजा बयान का असल मतलब क्या है?

हमारे साथ धोखा हुआ ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने रैली को दौरान कहा कि ‘मुझे नहीं पता कि आपका अगला राष्ट्रपति कौन होगा. मुझे लगता है कि कानून कहता है कि मुझे फिर से चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं है.’ साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने संविधान में लिखे शब्दों का अध्ययन किया है. इसके बाद 2020 के चुनाव का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उनके साथ धोखा हुआ था और इसलिए उन्हें फिर से चुनाव लड़ने का अधिकार है.
ट्रंप ने कहा कि ‘उन्होंने हमारे साथ धोखा किया. उन्होंने चुनाव में धांधली की.’ वो लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि 2020 का चुनाव उनसे छीन लिया गया था. हालांकि, इस दावे के समर्थन में व्यापक चुनावी धांधली का कोई सबूत सामने नहीं आया. उस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडेन ने जीत हासिल की थी.

ट्रंप के बयान का मतलब?

ट्रंप के बयान में दो बातें अहम हैं पहली- वह खुद स्वीकार कर रहे हैं कि संविधान में राष्ट्रपति के कार्यकाल की सीमा तय है. दूसरी- वह साल 2020 के चुनाव में कथित धांधली को आधार बनाकर इस सीमा से अलग रास्ता निकालने की बात कर रहे हैं. लेकिन चुनाव में हारने के बाद धांधली का आरोप लगाने से किसी उम्मीदवार को संविधान में तय कार्यकाल की सीमा से छूट नहीं मिल जाती. ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप का दावा सिर्फ उनकी राजनीतिक दलील है. यदि वह 2028 में चुनाव लड़ने की कोशिश करते हैं, तो उनकी पात्रता को लेकर बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो सकता है.

आखिर क्यों बनाया गया 22वां संशोधन?

अमेरिका में पहले राष्ट्रपति के लिए दो कार्यकाल की कोई स्पष्ट संवैधानिक सीमा नहीं थी. पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट चार बार राष्ट्रपति चुने गए थे. उनकी मृत्यु चौथे कार्यकाल के दौरान हुई. इसके बाद राष्ट्रपति के कार्यकाल को सीमित करने की मांग तेज हुई और 22वें संशोधन को 1951 में संविधान का हिस्सा बनाया गया, जिसका उद्देश्य किसी एक व्यक्ति के हाथ में लंबे समय तक राष्ट्रपति पद की शक्ति केंद्रित होने से रोकना था.

क्या संविधान बदलकर तीसरी बार राष्ट्रपति बन सकते हैं ट्रंप?

सैद्धांतिक रूप से ऐसा संभव हो सकता है, लेकिन इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा. अमेरिकी व्यवस्था में इसके लिए कांग्रेस के दोनों सदनों में दो-तिहाई समर्थन और कम से कम तीन-चौथाई राज्यों की मंजूरी जरूरी होती है. यह बेहद कठिन प्रक्रिया है. एक दूसरा विचार भी चर्चा में रहा है कि ट्रंप उपराष्ट्रपति के रास्ते दोबारा राष्ट्रपति बन सकते हैं. इस तर्क के मुताबिक, अगर कोई दूसरा उम्मीदवार राष्ट्रपति बनकर बाद में पद छोड़ दे, तो ट्रंप को पद मिल सकता है. लेकिन अमेरिकी संविधान का 12वां संशोधन इस रास्ते पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े करता है. इसके अनुसार, जो व्यक्ति राष्ट्रपति बनने के लिए संवैधानिक रूप से अयोग्य है, वह उपराष्ट्रपति भी नहीं बन सकता. ऐसे किसी प्रयास को अदालत में चुनौती मिलने की आशंका भी रहेगी.
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