फ्रांसः फिर भड़क सकती है हिंसा, उपद्रवियों के खिलाफ मैक्रों सरकार ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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France Protests: फ्रांस में फिर हिंसा भड़कने की संभानवा है. यहां महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं की बदहाली और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीतियों के खिलाफ शनिवार को एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की तैयारी है.

हिंसा और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सरकार ने देशभर में 70000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है. यह प्रदर्शन हैलोवीन के दिन हो रहे हैं, ठीक दो हफ्ते पहले हुए दंगों और लूटपाट के बाद जिसमें कई दुकानों, सार्वजनिक इमारतों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा था.

मार्च पर पाबंदी

गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन किसी भी तरह की गड़बड़ी से बेहद सख्ती से निपटेगा. उन्होंने इस दिन को अत्यधिक जोखिम वाला बताया है. फ्रांस की शीर्ष प्रशासनिक अदालत ने पेरिस के प्रमुख चौकों रिपब्लिक और बास्तिल के बीच यूनियनों द्वारा प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने के फैसले को बरकरार रखा है.

अब यह प्रदर्शन शहर के मुख्य बाजारों से दूर, पूर्वी बाहरी इलाकों के बुलेवार्ड्स पर ही किए जा सकेंगे. पुलिस को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे चेहरे को ढकने वाले हैलोवीन मास्क पर रोक लगा सकें, ताकि उपद्रवी अपनी पहचान न छिपा सकें. अमेरिकी दूतावास ने भी अपने नागरिकों को इन प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने को कहा है.

जनता में गुस्से की वजहें क्या है?

विरोध प्रदर्शनों का यह सिलसिला सितंबर के अंत में शुरू हुआ था, जब मैक्रों सरकार ने 2027 के बजट पर बातचीत शुरू की थी. देश पर जीडीपी के करीब 120% के बराबर कर्ज का बोझ है और ब्याज दरें बढ़ रही हैं, जिससे सरकार खर्चों में कटौती करने को मजबूर है.

स्कूलों की खस्ता हालत, कक्षाओं में भीड़ और कॉलेज दाखिले की प्रणाली से नाराज छात्रों के साथ अब मजदूर संगठन और दोबारा सक्रिय हुआ येलो वेस्ट आंदोलन भी शामिल हो गया है. सरकार द्वारा शिक्षा सुधारों और ईंधन की कीमतों में राहत के वादों के बावजूद लोगों का असंतोष शांत नहीं हुआ है.

फ्रांस के इन प्रदर्शनों की लहर यूरोप के अन्य देशों तक भी पहुंच गई है, जहां शनिवार को जर्मनी के 30 से अधिक शहरों में युवाओं के प्रदर्शन चल रहे हैं. राजनीतिक मोर्चे पर इस जनाक्रोश का सीधा फायदा दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन को मिलता दिख रहा है, जो अप्रैल में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के ओपिनियन पोल्स में आगे चल रही हैं, जबकि मैक्रों के संभावित उत्तराधिकारी आपस में बंटे हुए हैं.

अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका

यह अशांति पहले से ही सुस्त पड़ती फ्रांसीसी अर्थव्यवस्था के लिए एक और बड़ा झटका साबित हुई है. चैंबर ऑफ कॉमर्स का अनुमान है कि खुदरा व्यापारियों को 1 अरब यूरो से अधिक का नुकसान हो चुका है, और गैर-बीमाकृत नुकसान को जोड़कर यह आंकड़ा दोगुना हो सकता है.

पेरिस के मुख्य बाजारों में लक्जरी ब्रांड्स जैसे हरमेस, लुई विटन और बरबरी की दुकानों को पिछले उपद्रव में निशाना बनाया गया था, जिसके चलते अब दुकानों को सुरक्षा ग्रिल और तख्तों से ढका गया है।इस बीच, सरकार एक कड़ा कानून ला रही है, जिसके तहत उपद्रवियों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के बदले 10000 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. हालांकि, मानवाधिकार समूह इसका विरोध शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के हनन के तौर पर कर रहे हैं.

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