Drug Import Policy: देश में दवाओं, मेडिकल डिवाइस और कॉस्मेटिक्स के आयात को अधिक सुगम बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स नियम, 1945 के नियम 43ए में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत देश में दवाओं के आयात के लिए अधिकृत एंट्री पॉइंट्स का नेटवर्क बढ़ाया जाएगा. सरकार के इस कदम का उद्देश्य हेल्थकेयर उत्पादों की सप्लाई चेन को मजबूत करना, लॉजिस्टिक्स लागत घटाना और आयात प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है.
ड्रग्स नियम, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव
3 नवंबर को जारी सूचना के अनुसार, ड्रग्स नियम, 1945 का नियम 43ए उन अधिकृत बंदरगाहों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, सड़क क्रॉसिंग और अन्य प्रवेश बिंदुओं को निर्धारित करता है, जिनके माध्यम से भारत में दवाओं का आयात किया जा सकता है. व्यापार को बढ़ावा देने और आयात से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मंत्रालय ने अधिकृत स्थानों की मौजूदा सूची में अतिरिक्त इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) और एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है.
हरियाणा, यूपी समेत कई राज्यों को मिलेगी सुविधा
प्रस्तावित सूची में नौ नए स्थान शामिल किए गए हैं. इनमें हरियाणा के आईसीडी सोनीपत, पियाला और हरसारू, उत्तर प्रदेश के आईसीडी दादरी, गुजरात के आईसीडी गांधीनगर/मुंद्रा, तेलंगाना के हैदराबाद स्थित आईसीडी सनत नगर और थिम्मापुर तथा कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित आईसीडी व्हाइटफील्ड शामिल हैं. इसके अलावा कर्नाटक के बोम्मसांद्रा स्थित विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) और उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से हवाई मार्ग से दवाओं के आयात की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है.
मौजूदा आयात केंद्रों के नेटवर्क का होगा विस्तार
ये नए स्थान दवाओं के आयात के लिए पहले से अधिकृत एंट्री पॉइंट्स के नेटवर्क में जोड़े जाएंगे. मौजूदा सूची में मध्य प्रदेश के इंदौर में धनाड और तीही स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो के साथ-साथ दवाओं के आयात के लिए अधिसूचित हवाई अड्डे भी शामिल हैं.
लॉजिस्टिक्स लागत और परिवहन समय घटने की उम्मीद
मंत्रालय के मुताबिक, प्रस्तावित विस्तार से आयातकों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, वेयरहाउस और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के नजदीक ही आयातित खेपों को क्लीयर कराने की सुविधा मिलेगी. इससे अंदरूनी परिवहन की दूरी कम होगी और लॉजिस्टिक्स पर होने वाला खर्च घट सकता है. इसके साथ ही आयातित सामान की आवाजाही में लगने वाला समय और देरी भी कम होने की उम्मीद है. इससे आयातकों को परिचालन संबंधी सुविधा मिलेगी और देश के अलग-अलग हिस्सों में दवाओं, मेडिकल डिवाइस और कॉस्मेटिक्स की आपूर्ति अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी.
आपत्ति और सुझाव भेजने का भी मौका
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य हेल्थकेयर उत्पादों के आयात से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, कारोबार में सुगमता बढ़ाना और सप्लाई चेन को अधिक कुशल बनाना है. इससे जरूरी स्वास्थ्य उत्पादों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है. प्रस्तावित संशोधन को लेकर किसी भी तरह की आपत्ति या सुझाव अवर सचिव (ड्रग्स रेगुलेशन), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को भेजे जा सकते हैं. इसके लिए ईमेल के माध्यम से भी सुझाव देने की व्यवस्था की गई है. मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को आधिकारिक गजट में उपलब्ध कराया है.

