Ajab Gajab: कल्पना कीजिए कि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, अपने घर में रह रहे हैं और सामान्य जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन अचानक आपको पता चले कि सरकारी रिकॉर्ड में आप इस दुनिया से जा चुके हैं. सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक बुजुर्ग महिला के साथ ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां सरकारी सिस्टम की एक बड़ी लापरवाही ने एक महिला की जिंदगी को मुश्किलों से भर दिया.
कागजों पर खत्म हो गया महिला का अस्तित्व
दमोह जिला पंचायत के अंतर्गत आने वाले बिलाई गांव की रहने वाली दीपारानी पटेल को करीब एक साल पहले सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था. किसी कर्मचारी की लापरवाही से हुई इस गलती ने उनकी पूरी जिंदगी बदलकर रख दी. असल जिंदगी में वह पूरी तरह जीवित थीं, लेकिन सरकारी कागजों में उनका अस्तित्व ही खत्म हो चुका था.
सरकारी सुविधाएं भी एक झटके में हो गईं बंद
सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित होते ही दीपारानी पटेल को मिलने वाली बुजुर्ग पेंशन रोक दी गई. इसके साथ ही मुफ्त राशन और अन्य कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी बंद कर दिया गया. जिन सुविधाओं के सहारे उनका जीवन चल रहा था, वे अचानक उनसे छिन गईं. एक गरीब और बुजुर्ग महिला के लिए यह किसी बड़े संकट से कम नहीं था. आर्थिक परेशानी के साथ-साथ मानसिक तनाव भी लगातार बढ़ने लगा. एक गलती की सजा उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में भुगतनी पड़ रही थी.
एक साल तक दफ्तरों के चक्कर काटती रहीं महिला
दीपारानी पटेल ने अपनी समस्या को लेकर कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए. उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी परेशानी रखी, मदद मांगी और कई बार अपनी बात समझाने की कोशिश की, लेकिन सरकारी सिस्टम की सुस्ती के आगे उनकी आवाज दबती चली गई. करीब एक साल तक वह अपनी पहचान वापस पाने के लिए संघर्ष करती रहीं. जब कहीं से कोई समाधान नहीं मिला तो आखिरकार उन्होंने सीधे जिले के कलेक्टर से मिलने का फैसला किया.
‘साहब, आप डॉक्टर बुलाकर चेक करवा लीजिए… मैं भूत नहीं हूं’
जनसुनवाई के दौरान जब दीपारानी पटेल कलेक्टर सुधीर कोचर के चैंबर में पहुंचीं तो वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए. बुजुर्ग महिला ने बेहद लाचारी और हिम्मत के मिले-जुले अंदाज में कलेक्टर से कहा, ‘साहब, कृपया मेरी जांच करवा लीजिए, आप चाहें तो यहीं डॉक्टर बुलाकर चेक करवा लें… मैं भूत नहीं हूं, आपके सामने जीती-जागती खड़ी हूं. लेकिन आपके ये सरकारी कागज कह रहे हैं कि मैं मर चुकी हूं.’ महिला की यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए शांत हो गए. उनके हाथ में मौजूद दस्तावेज भी यही बता रहे थे कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित किया जा चुका था.
कलेक्टर ने तुरंत लिया बड़ा फैसला
कलेक्टर सुधीर कोचर ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत संबंधित अधिकारियों को बुलाया. जांच के दौरान रिकॉर्ड में हुई गलती सामने आने के बाद मौके पर ही दस्तावेज सुधारने की प्रक्रिया शुरू की गई. इसके बाद महिला को दोबारा सरकारी रिकॉर्ड में जीवित घोषित किया गया और उनकी बंद की गई सभी सरकारी सुविधाओं को बहाल करने के आदेश जारी किए गए.
दोषी कर्मचारियों पर भी गिरेगी गाज
कलेक्टर सुधीर कोचर ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि महिला का रिकॉर्ड तो ठीक कर दिया गया है, लेकिन जीती-जागती महिला को कागजों पर मारने वाले दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा. उनके निलंबन (सस्पेंशन) की कार्रवाई शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी ऐसी गंभीर लापरवाही करने की जुर्रत न कर सके.
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