Dry Fruits : जब बात महंगे मेवों की आती है, तो अक्सर हमारे दिमाग में काजू, बादाम या पिस्ता की तस्वीर उभरती है, लेकिन बता दें कि भारत के बाजारों में एक ऐसा सूखा मेवा भी बिकता है जिसकी कीमत सुनकर अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं? इस फ्रूट का नाम चिलगोजा है जिसे पाइन नट्स भी कहा जाता है. माना जाता है कि यह कोई साधारण मेवा नहीं है, बल्कि भारत के दुर्गम पहाड़ी इलाकों का वो ‘सफेद सोना’ है, जिसे हासिल करना और बेचना दोनों ही बड़ी चुनौती है.
जानकारी के मुताबिक, भारत में चिलगोजा को सबसे प्रीमियम और महंगा ड्राई फ्रूट माना जाता है, क्योंकि सामान्य बादाम 800 से 1,200 रुपये और काजू 1,500 रुपये प्रति किलो तक मिल जाते हैं, लेकिन वहीं बात करें अच्छी गुणवत्ता वाले चिलगोजा की, तो इसकी कीमत 7,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है.
विशेष परिस्थितियों और मांग बढ़ने पर इसकी कीमतें इससे भी ऊपर निकल जाती हैं. यह अंतर इतना बड़ा है कि एक किलो चिलगोजा के दाम में आप कई किलो बादाम और अखरोट खरीद सकते हैं. बता दें कि चिलगोजा हर जगह नहीं उगता है. इसके लिए खास ठंडी जलवायु और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की जरूरत होती है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत में यह मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है. इसके साथ ही चिलगोजा के पेड़ देवदार की प्रजाति के होते हैं और इनके फलों को ‘शंकु’ कहा जाता है. बता दें कि इन ऊंचे पेड़ों से फल तोड़ना जान जोखिम में डालने जैसा काम है, क्योंकि बताया जा रहा है कि ये पेड़ अक्सर खड़ी ढलानों पर स्थित होते हैं. चिलगोजा के इतना महंगा होने का सबसे बड़ा कारण इसे तैयार करने की प्रक्रिया है. ऊंचे पहाड़ों पर चढ़कर शंकु तोड़ना पहला कदम है. इसके बाद इन शंकु को सुखाया जाता है और फिर हाथ से एक-एक बीज निकाला जाता है.
माना जाता है कि इसके लिए मशीनों का इस्तेमाल नहीं कर सकते. इसलिए पूरी प्रक्रिया मानवीय श्रम पर टिकी है. एक किलो साफ चिलगोजा निकालने में कई घंटों की मेहनत लगती है. सीमित उत्पादन और कठिन परिश्रम ही इसकी कीमत को आसमान पर पहुंचा देता है. इतना ही नही बल्कि चिलगोजा की मांग भारत के रईसों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी भारी खपत है. बता दें कि इटैलियन और मेडिटेरेनियन व्यंजनों में पाइन नट्स का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के लिए अनिवार्य रूप से किया जाता है. चूंकि इसका उत्पादन केवल दुनिया के कुछ खास हिस्सों में ही होता है, इसलिए इसकी सप्लाई हमेशा मांग से कम रहती है. यही कारण है कि यह ड्राई फ्रूट हमेशा आम आदमी की पहुंच से दूर और खास मौकों तक सीमित रहता है.
इतनी ऊंची कीमत होने के बावजूद लोग इसे खरीदते हैं, क्योंकि यह सेहत के लिए वरदान माना जाता है. इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. इसका स्वाद हल्का मीठा और मक्खन जैसा होता है, जो इसे अन्य मेवों से बिल्कुल अलग बनाता है.
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