12 September 2026 Ka Panchang: शनिवार का पंचांग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

12 September 2026 Ka Panchang: 12 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी. प्रतिपदा तिथि सुबह 07:47 मिनट तक रहेगी, इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू हो जाएगी. इस दिन दोपहर बाद 03:10 मिनट तक शुभ योग रहेगा. नाम के अनुरूप शुभ योग को मंगलकारी माना जाता है. मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों से शुभ परिणाम मिलने के साथ प्रसिद्धि भी प्राप्त हो सकती है.

वहीं, शनिवार को दोपहर 12:56 मिनट तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा. ऐसे में धार्मिक कार्यों और शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए दिन की शुरुआत करने से पहले पंचांग की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा. आइए जानते हैं 12 सितंबर 2026 का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय…

12 सितंबर 2026 का पंचांग

  • भाद्रपद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि: सुबह 7 बजकर 47 मिनट तक, इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू होगी.
  • शुभ योग: दोपहर बाद 3 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.
  • उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र: दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा.
  • दिन: शनिवार.

12 सितंबर के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 बजे से 5:39 बजे तक
  • प्रातः संध्या: सुबह 5:15 बजे से 6:25 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:10 बजे से 12:59 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:38 बजे से 3:27 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:44 बजे से 7:07 बजे तक
  • सायाह्न संध्या: शाम 6:44 बजे से 7:54 बजे तक
  • त्रिपुष्कर योग: सुबह 7:46 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक

शनिवार को कब रहेगा राहुकाल?

  • दिल्ली: सुबह 9:11 बजे से 10:44 बजे तक
  • मुंबई: सुबह 9:30 बजे से 11:03 बजे तक
  • चंडीगढ़: सुबह 9:12 बजे से 10:46 बजे तक
  • लखनऊ: सुबह 8:57 बजे से 10:29 बजे तक
  • भोपाल: सुबह 9:11 बजे से 10:40 बजे तक
  • कोलकाता: सुबह 8:28 बजे से 10:00 बजे तक
  • अहमदाबाद: सुबह 9:30 बजे से 11:03 बजे तक
  • चेन्नई: सुबह 9:01 बजे से 10:33 बजे तक

12 सितंबर को सूर्योदय और सूर्यास्त

  • सूर्योदय: सुबह 6:04 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 6:29 बजे

उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का महत्व

12 सितंबर को दोपहर 12:56 बजे तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा. आकाशमंडल में मौजूद 27 नक्षत्रों में उत्तराफाल्गुनी को बारहवां नक्षत्र माना जाता है. इसका प्रतीक चिन्ह विश्राम के लिए इस्तेमाल होने वाली चारपाई या बेड के पिछले दो पायों को माना गया है. ज्योतिष के अनुसार उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का पहला चरण सिंह राशि में आता है, जबकि इसके बाकी तीन चरण कन्या राशि में आते हैं. इसलिए सिंह और कन्या राशि के जातकों पर इस नक्षत्र का प्रभाव माना जाता है. उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्यदेव हैं. इसलिए इस नक्षत्र से जुड़े ज्योतिषीय प्रभावों में सूर्य का महत्व भी माना जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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