18 August 2026 Ka Panchang: मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है. 18 अगस्त 2026 को सावन के मंगलवार के साथ मंगला गौरी व्रत और कल्कि जयंती भी है. इस दिन शुक्ल योग और स्वाती नक्षत्र का संयोग रहेगा. ऐसे में पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए दिन के शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय जानना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं 18 अगस्त 2026 का पूरा पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और मंगला गौरी व्रत से जुड़ी खास बातें…
18 अगस्त 2026 का पंचांग
- तिथि: श्रावण शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 18 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगी.
- शुक्ल योग: 18 अगस्त को देर रात 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगा.
- स्वाती नक्षत्र: 18 अगस्त को पूरे दिन और पूरी रात पार करके अगले दिन सुबह 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा.
- विशेष: कल्कि जयंती और मंगला गौरी व्रत.
18 अगस्त 2026 के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:50 बजे से 05:35 बजे तक.
- प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:13 बजे से 06:20 बजे तक.
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से 01:08 बजे तक.
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:50 बजे से 03:40 बजे तक.
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:04 बजे से 07:27 बजे तक.
- सायाह्न सन्ध्या: शाम 07:04 बजे से 08:12 बजे तक.
- अमृत काल: रात 09:19 बजे से 11:02 बजे तक.
शहरों के अनुसार राहुकाल का समय
- दिल्ली: दोपहर बाद 03:41 बजे से 05:19 बजे तक.
- मुंबई: दोपहर बाद 03:53 बजे से 05:29 बजे तक.
- चंडीगढ़: दोपहर बाद 03:44 बजे से 05:23 बजे तक.
- लखनऊ: दोपहर बाद 03:25 बजे से 05:03 बजे तक.
- भोपाल: दोपहर बाद 03:37 बजे से 05:14 बजे तक.
- कोलकाता: दोपहर 02:53 बजे से 04:29 बजे तक.
- अहमदाबाद: दोपहर बाद 03:56 बजे से 05:33 बजे तक.
- चेन्नई: दोपहर बाद 03:20 बजे से 04:54 बजे तक.
18 अगस्त को सूर्योदय और सूर्यास्त
- सूर्योदय: सुबह 05:51 बजे.
- सूर्यास्त: शाम 06:58 बजे.
मंगला गौरी व्रत का महत्व
सावन के महीने में आने वाले मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से सुहागिन महिलाओं को सौभाग्य की प्राप्ति होती है. साथ ही विवाह में आ रही परेशानियों का अंत होने की मान्यता भी है. वहीं, अविवाहित कन्याओं के लिए भी यह व्रत विशेष माना जाता है. धार्मिक मत के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से उन्हें योग्य वर की प्राप्ति हो सकती है. मंगला गौरी व्रत रखने वालों को इस दिन मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए. मान्यता है कि तभी इस व्रत का शुभ फल प्राप्त होता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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