प्रभु प्रेम से जीवन के सभी दुःख हो सकते हैं दूर: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रत्येक व्यक्ति दुःख के भंवरजाल में उलझा हुआ है। आज करोड़पति धन की सुरक्षा के लिये चिन्तित है तो रंकपति धन के अभाव से दुःखी है। विवाहित व्यक्ति अपनी कलह कारिणी पत्नी व परिवार से दुःखी है तो अविवाहित विवाह न होने के कारण दुःखी है।
नि:संतान अभिभावक अपनी सूनी गोंद के कारण दुःखी हैं तो संतान वाले माता-पिता अपनी उच्छृंखल संतान से परेशान हैं। इसलिये दुःख व सुख न तो अभाव में है और न ही  अतिभाव में है। दुःख का मूल कारण है- अपना अज्ञान,अपना असंतोष व अपनी आसक्ति।
अभिलाषा÷मुझे ऐसा बना दो मेरे प्रभु,जीवन में लगे ठोकर न कहीं। जाने अनजाने भी मुझसे, अपकार किसी का हो न कहीं।।
उपकार सदा करता जाऊं, दुनियां अपकार भले ही करे। बदनामी न जग में हो मेरी, कोई नाम भले ही दे न कहीं।। 
तू ही इक ऐसा साथी है, दुःख में भी साथ नहीं तजता। दुनियां प्यार करे न करे, खोऊं तेरा भी न प्यार कहीं।। 
जो तेरा बनकर रहता है, कांटों में गुलाब सा खिलता है। कितने ही कांटे पांव चुभें, पर फूल भी हों कांटे न कहीं।। 
मन हो मधु पूर्ण कलश मेरा, आंखों में ज्योति छलकती हो। तुमसे मधु पीने को ऐसा, जगता ही रहूं सोऊं न कहीं।।
मैं क्या हूं क्या मेरा पथ है, यह सत्य सदा मैं समझ सकूं। इस सतपथ पर चलते-चलते, मेरे पांव थके न रुके न कहीं।। 
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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