स्नान से तन, ध्यान से मन और दान से धन की होती है शुद्धि: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, मन पर अन्धविश्वास करने वाला अन्त में फंस जाता है। मृत्यु के समय तो जीवन में किया हुआ नाम-स्मरण और सत्कर्म ही साथ जाता है। किसी भी प्रकार का सत्कर्म किए बिना जो खाता है, वह पाप को ही खाता है। स्नान से तन की शुद्धि, ध्यान से मन की शुद्धि और दान से धन की शुद्धि होती है।
ध्यान का सच्चा आनन्द प्रातःकाल ही प्राप्त किया जा सकता है। मन अति शुद्ध हो तभी प्रभु मिलन की उत्कंठा जाग्रत होती है। यदि हृदय हमेशा भगवद् भाव में ही डूबा होगा तो पाप एवं विकार का नाश होगा।सन्मुख आए हुए जीव को प्रभु-प्रेम से गले लगाते हैं।
कुछ मनुष्य घर की स्थिति अच्छी होनी तथा अच्छे प्रमाण में पैन्शन मिलने पर भी दूसरी नौकरी ढूंढते हैं, यह अच्छी बात नहीं है। पैन्शन होने पर तो प्रभु की नौकरी ही करनी चाहिए। पैन्शन होने पर तो प्रभु को प्रसन्न करने वाली प्रवृत्तियां ही करनी चाहिए।
वृद्धावस्था में पैन्शन की व्यवस्था हो तो रोज 21600 बार प्रभु का नाम जप करके जीवन को शांति प्राप्त कराने के लिए की गई है। इसके बाद दूसरी नौकरी ढूंढें, यह अच्छी बात नहीं है। 55 वर्ष के बाद घर में रहने के बजाय तीर्थ में निवास करो। और यदि घर में ही रहना पड़े तो बहुत सावधानी पूर्वक सात्विक जीवन व्यतीत करो।
55 वर्ष बाद निवृत्ति ही खोजो। किसी प्रवृत्ति, बल्कि बहुत परोपकार की प्रवृत्ति में भी मत पड़ो। नहीं तो वह प्रवृत्ति भी अभिमानी बना देगी और परमात्मा को भुला देगी। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
Latest News

पाकिस्‍तान-अफगानिस्‍तान की जंग में कौन किस पर रहेगा भारी? कैसी होगी टक्कर..!

New Delhi: पाकिस्‍तान और अफगानिस्‍तान के बीच जारी तनाव अब टकराव में बदल गया है. अब सवाल यह है...

More Articles Like This

Exit mobile version