Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर करें इन चमत्कारी मंत्रों का जाप, पूरी होगी सभी मनोकामना

Divya Rai
Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Hartalika Teej 2026: हिंदू धर्म में हरतालिका तीज का विशेष महत्व है. इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति के दीर्घायु के लिए और कुंवारी लड़कियां मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए तीज का व्रत रखती हैं. धार्मिक मान्यतानुसार जो महिलाएं व लड़कियां हरतालिका तीज का व्रत रखकर विधि विधान से व्रत के सभी नियमों का पालन करते हुए भगवान शिव के साथ मां पार्वती की पूजा करती हैं, उनका वैवाहिक जीवन सुखमय व्यतीत होता है. आइए जानते हैं कब रखा जाएगा हरतालिका तीज का व्रत और इस दिन कैसे करें मां पार्वती की पूजा…

कब रखा जाएगा Hartalika Teej 2026 का व्रत

हिंदू ज्योतिष पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि की शुरुआत 13 सितंबर को सुबह 07:08 बजे से हो गई है. तिथि का समापन अगले दिन 14 सितंबर को सुबह 07:06 बजे बजे होगा. हिंदू धर्म में उदया तिथि सर्वमान्य होती है. इसलिए हरतालिका तीज 14 सितंबर को मनाई जाएगी.

हरतालिका तीज पूजा मंत्र

हरतालिका तीज के दिन भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो महिलाएं और कुंवारी लड़कियां व्रत रखती हैं और भगवान शिव की पूजा करने के साथ माता पार्वती को 16 श्रृंगार की वस्तुएं चढ़ाती हैं. इसके बाद नीचे दिए गए मंत्रों में से किसी भी मंत्र का अपने मनोकामना अनुसार जाप करता है तो उनकी मनवांछित मनोकामना अवश्य पूरी होती है. साथ ही उनके लाइफ में आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती है. आइए जानते हैं इन मंत्रों के बारे में…

1- घर में सुख समृद्धि के लिए

ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः
ऊँ गौरये नमः
ऊँ पार्वत्यै नमः

2- संतान प्राप्ति के लिए

‘ऊँ साम्ब शिवाय नमः’

‘मुनि अनुशासन गनपति हि पूजेहु शंभु भवानि।
कोउ सुनि संशय करै जनि सुर अनादि जिय जानि’

3- मनचाहा वर पाने के लिए

यदि आप हरतालिका तीज का व्रत रख रही हैं और आप कुंवारी हैं आप मनचाहा वर पाना चाहती हैं तो हरतालिका तीज के दिन इस मंत्र का जाप करे-

हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया।
तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।

4- विवाह में आ रही है समस्या

यदि किसी कारण बस आपके विवाह में समस्या आ रही है तो आपको हरतालिका तीज के दिन इस मंत्र का जाप करना चाहिए

अस्य स्वयंवरकलामंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, अतिजगति छन्दः, देवीगिरिपुत्रीस्वयंवरादेवतात्मनोऽभीष्ट सिद्धये मंत्र जपे विनियोगः।

5- कार्य में सफलता पाने के लिए

ऊँ ह्लीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न जानकारियों पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

ये भी पढ़ें- ऋषि पंचमी व्रत की विधि क्या है? महिलाओं के लिए क्यों खास है ये दिन, जानें महत्व और पूजा का सही तरीका

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