Kasimabad (Ghazipur): 83 दिवसीय जयगुरुदेव जनजागरण यात्रा के बत्तीसवें पड़ाव वि.ख. कासिमाबाद के ग्राम सुरवत में संस्थाध्यक्ष सन्त पंकज जी का आध्यात्मिक-वैचारिक सत्संग हुआ. उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा भाईयों-बहनों! जब हम इस संसार में पैदा हुये तो न कोई जाति या बिरादरी लेकर आये, न कोई मजहब लेकर आये, न कोई नाम लेकर आये सिर्फ नंगे रोते हुये पैदा हुये. बाद में जो अजार परमात्मा ने मन, बुद्धि, चित्त के बक्षे उससे हमारे अन्दर चेतना आ गई.
हमारा नाम पड़ गया, कर्म के अनुसार हमारी जाति बन गई. धीरे-धीरे हमारा फैलाव दुनिया में होता चला गया. जब श्वासों का भण्डार खाली हुआ तो धर्मराज के सिपाही आकर जीवात्मा को निकाल कर उनको धर्मराज की कचहरी में पेश कर दिया. वहां जरा सी देर में हिसाब हो गया. आप को सजा दे दी कि ले जाओ इन्हें फला नर्क में डाल दो क्योंकि हमारी पाक साफ शरीर को इन्होंने बुरे कर्मों से गन्दा कर दिया. आप सोचेंगे जब मृत्यु के बाद शरीर यहीं पड़ा रह गया तो किसे सजा मिलती है. ध्यान दीजिये हमारी आप की आत्मा कारण, सूक्ष्म, लिंग और स्थूल शरीरों में बन्द है.
इस स्थूल शरीर के छूटने के बाद इसी शरीर से मिलती लिंग षरीर में कर्मों का भुगतान कराया जाता है. खोटे-बुरे कर्मों को करने वाले जीवों को नर्कों में भयानक सजायें दी जा रही हैं. लाखों मील तक रोने चिल्लाने की आवाज जाती है. कोई बचाने वाला नहीं. सन्त महापुरुष साधना करके जब ऊपर के लोकों में जाते हैं इस भयावह दृश्य को देखकर द्रवित हो जाते हैं. वे उससे बचने का सन्देश देते हैं. बताई गई साधना से आप लोग भी इसे देख सकते हैं.
इसलिये अशुद्ध खान-पान को त्याग कर मानव धर्म-कर्म का पालन करें. मानव धर्म यह है कि इन्सान-इन्सान एक दूसरे के काम आये. निःस्वार्थ भाव से एक-दूसरे की सेवा करें. सत्य, दया, करुणा, अहिंसा के गुणों को अपनायें. इस प्रकार अपनी आत्मा का कल्याण करा लें. यही असली मानव धर्म है.
उन्होंने बताया ‘जयगुरुदेव’ समय का सिद्ध नाम है जिसे बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने जगाया. इस नाम जहाज पर अगर दुनिया के सारे जीव बैठ जाय तो यह सबको पार कर देगा. जयगुरुदेव नाम के साथ यह संकल्प जुड़ा है कि ‘‘जन-जन की जबान पर जब जयगुरुदेव आयेगा, सच्ची स्वतंत्रता का तब आनन्द पायेगा.
संस्थाध्यक्ष ने बताया कि मथुरा में आगरा-दिल्ली बाईपास पर वरदानी जयगुरुदेव नाम योग साधना मन्दिर बना है. जहां बुराईयां चढ़ाने पर मनोकामना की पूर्ति होती है. इस अनूठे मन्दिर के बारे में पहले के संतों ने बनवाने की भविष्यवाणी अपने ग्रन्थों में किया है. यहीं पर आगामी 3 से 5 मार्च तक होली सत्संग मेले का आयोजन संस्था करेगी. आप लोग भी इस पावन अवसर पर पधारें. शान्ति व्यवस्था में पुलिस प्रशासन का सहयोग रहा. महाराज जी ने सभी आगन्तुकों का हार्दिक आभार व्यक्त किया तथा सुखमय भविष्य की मंगल कामना किया.
इस अवसर पर मनोज गुप्ता, खेदारू कुशवाहा, अखिलेश राय, सुरेश गुप्ता, राकेश विश्वकर्मा, उमेश विश्वकर्मा, मनजीत ठाकुर, दयानन्द चौरसिया, डा. तारकेस्वर तथा सहयोगी संगत बस्ती के रामउजागिर चौधरी, अर्जलाल मास्टर, मेंहीलाल चौधरी, संस्था के कई पदाधिकारीगण एवं प्रबन्ध सामिति के सदस्य मौजूद रहे.