सत्संग और अच्छे संस्कारों से बदलता है जीवन: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रकाश धीरे-धीरे होता है जबकि अंधेरा तत्काल हो जाता है। सुबह में सूर्य भगवान् पूर्व दिशा में उगते हैं। प्रकाश तो केवल पूर्व दिशा से आता है लेकिन अंधकार दसों दिशाओं से आता है। सूर्य के अस्त होते ही अंधकार हो जाता है। प्रकाश होने में ब्रह्ममुहूर्त से काफी समय लग जाता है। सत्संग की अपेक्षा कुसंग का प्रभाव जल्दी पड़ता है। इसलिए धर्मशास्त्र कहते हैं कुसंग से बचना सबसे बड़ा सत्संग है।
खराब आदत- एक युवक एक संत के पास गया और पूँछा- मनुष्य किसी भी खराब आदत को जितनी आसानी से अपना लेता है, उतनी ही आसानी से उसे छोड़ क्यों नहीं पाता।
इसके लिये अत्यधिक आत्मबल और प्रयासों की जरूरत क्यों पड़ती है?संत ने सामने रस्सी बना रहे किसान की ओर इशारा करके कहा- ‘ वहां देखो , क्या इस बिना बटी हुई रस्सी को तुम तोड़ सकते हो? युवक ने कहा- बड़ी आसानी से एक ही झटके में।
संत ने पूछा- और बटी हुई रस्सी को? युवक ने कहा- पूरी ताकत लगाकर भी नहीं तोड़ सकता।  संत ने कहा- मनुष्य की आदत भी रस्सी की तरह है, जिसमें हम नित्य आसानी से बट देते हैं, लेकिन अन्त में इसे तोड़ नहीं सकते। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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