Maha Saptami Ashtami Navami 2026 Date: नवरात्रि के नौ दिनों में घर-घर मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है और माता से आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है. इन 9 दिन व्रत रखकर माता की सेवा की जाती है. लेकिन इस बार नवरात्रि के पर्व में सप्तमी तिथि की पूजा दो दिन की जाएगी, जिसकी वजह से अष्टमी और नवमी तिथि की पूजा को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन महाअष्टमी और महानवमी की पूजा की जाएगी. हालांकि इन सब के बीच विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जाना तय है.
नवरात्रि 2026 महासप्तमी
आश्विन मास की सप्तमी तिथि की शुरुआत – 17 अक्टूबर, सुबह 5 बजकर 54 मिनट से
आश्विन मास की सप्तमी तिथि का समापन – 18 अक्टूबर, सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक
दोनों दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि होने की वजह से नवरात्रि के सातवें दिन की पूजा दो दिन की जाएगी. यानी 17 और 18 अक्टूबर दोनों दिन सप्तमी तिथि की पूजा की जाएगी. नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है और इसी दिन ही पंडालों में माता दुर्गा की आंखों से पट्टी हटाई जाती है यानी उनकी आंखें खोली जाती है.
नवरात्रि 2026 महाअष्टमी
आश्विन मास की अष्टमी तिथि की शुरुआत – 18 अक्टूबर, सुबह 8 बजकर 28 मिनट से
आश्विन मास की अष्टमी तिथि की समापन – 19 अक्टूबर, सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक
उदिया तिथि के आधार पर महाअष्टमी की पूजा 19 अक्टूबर दिन सोमवार को की जाएगी. नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है. साथ ही इस शुभ दिन पर कुछ घरों में कन्या पूजन भी किया जाता है. हालांकि जिन घरों में अष्टमी की कुलदेवी पूजा या तंत्र-मंत्र व साधना की जाती है, वे 18 अक्टूबर की रात को ही अष्टमी तिथि की पूजा करेंगे.
नवरात्रि 2026 महानवमी
आश्विन मास की नवमी तिथि की शुरुआत – 19 अक्टूबर, सुबह 10 बजकर 51 मिनट से
आश्विन मास की नवमी तिथि का समापन – 20 अक्टूबर, दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक
19 अक्टूबर की सुबह 10 बजकर 51 मिनट से नवमी तिथि के लगते ही दोपहर को नवमी की पूजा अर्चना और रात्रि के समय होने वाली साधना इसी दिन संपन्न की जाएगी. वहीं उदिया तिथि के आधार पर नवमी की पूजा करना चाहते हैं तो वे 20 अक्टूबर की सुबह नवमी पूजन, कन्या पूजन और हवन-अनुष्ठान आदि कार्य कर सकते हैं क्योंकि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक नवमी तिथि है, इसके बाद विजयादशी का पर्व शुरू हो जाएगा और इस दिन शस्त्र पूजन भी होगा. आप दोपहर तक कन्या पूजन कर लें, फिर आप दशहरा का पर्व मना सकते हैं.
20 अक्टूबर को महानवमी, कन्या पूजन और विजयादशमी
उदिया तिथि के आधार पर 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक नवमी तिथि विघमान रहने वाली है इसलिए 20 अक्टूबर को उदिया तिथि के आधार पर महानवमी की पूजा की जाएगी. इसके साथ कन्या पूजन आप 12 बजकर 50 मिनट तक सकते हैं, इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी और फिर विजया दशी का पर्व मनाया जाएगा.
19 अक्टूबर को संधि पूजा
19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 27 मिनट से दोपहर 11 बजकर 15 मिनट तक संधि पूजा कर सकते हैं. आपको संधि पूजन के लिए केवल 48 मिनट का समय मिलने वाला है. संधि पूजन, जब अष्टमी तिथि के समापन होने में अंतिम 24 मिनट बचे हों यानी 1 घटी बची हो और नवमी तिथि के शुरुआत के 24 मिनट (1 घटी) होते हैं, उस मिलन समय को संधि काल कहा जाता है. यह कुल समय 2 घंटे का यानी 48 मिनट का होता है. शास्त्रों के अनुसार, संधि काल में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की पूजा की जाती है क्योंकि इसी काल में मां दुर्गा ने चंड और मुंड असुर का वध किया था.