तारीख से लेकर पूजा तक….नवरात्रि और दुर्गा पूजा के बीच जानिए क्या-क्या है अंतर 

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Navratri and Durga Puja Difference: भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है और कई बार एक ही पर्व को कई नाम से जाना जाता है. जैसे कई लोग नवरात्रि और दुर्गा पूजा को एक ही मानते हैं हालांकि ऐसा होता नहीं है. इन त्योहारों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और सुख, समृद्धि, शक्ति तथा खुशहाली की कामना करते हैं. हालांकि, नवरात्रि और दुर्गा पूजा की परंपराओं, पूजा विधियों और उत्सव मनाने के तरीकों में कुछ अंतर हैं. नवरात्रि पूरे भारत में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है, जबकि दुर्गा पूजा विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और ओडिशा सहित पूर्वी भारत में बड़े उत्साह से मनाई जाती है. 

नवरात्रि और दुर्गा पूजा में क्या है अंतर?

नवरात्रि पूरे नौ दिनों तक चलते हैं लेकिन दुर्गा पूजा का उत्सव विशेष रूप से नवरात्रि की षष्ठी से दशमी तिथि तक मनाया जाता है. इन दोनों त्योहार एक ही तारीख में पड़ते हैं लेकिन दोनों की पहचान अलग-अलग है. नवरात्रि का अर्थ है नौ रातें. इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. भक्त व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और माता की आराधना करते हैं. वहीं दुर्गा पूजा में मां दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी की अराधना और पृथ्वी पर आगमन की परंपरा से जुड़ा होता है. दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और पूजा पंडाल सजाए जाते हैं. दोनों पर्व शक्ति की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं.

नवरात्रि किस तिथि को मनाई जाती है?

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और इसका समापन नवमी तिथि को होता है. इसके बाद दशमी तिथि को विजयादशमी मनाई जाती है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक नौ देवियों की पूजा होती है. इसके अलावा चैत्र नवरात्रि भी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होती है. नवरात्रि की शुरुआत और समापन की अंग्रेजी तारीख हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार बदलती है.

नवरात्रि और दुर्गा पूजा का धार्मिक महत्व

बता दें कि नवरात्रि का महत्व शक्ति, भक्ति, आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा है. धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को साहस, सकारात्मकता और मानसिक शांति प्राप्त होती है. वहीं दुर्गा पूजा मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक है. यह पर्व संदेश देता है कि सत्य और धर्म की अंततः जीत होती है. दुर्गा पूजा सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपराओं और सामूहिक उत्सव का भी प्रतीक है. इन दोनों पर्वों में भक्त मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना करते हैं.

नवरात्रि और दुर्गा पूजा में किस तरह की जाती है पूजा?

दरअसल, नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है. मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पुष्प, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित की जाती है. भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और प्रतिदिन आरती करते हैं. इसके बाद अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन किया जाता है.
वहीं दुर्गा पूजा में बड़े-बड़े पंडालों में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं. पुरोहित मंत्रोच्चार, पुष्पांजलि, भोग और आरती के माध्यम से पूजा संपन्न कराते हैं. महाअष्टमी पर संधि पूजा, नवमी पर विशेष पूजन और दशमी पर विसर्जन प्रमुख परंपराएं हैं. इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक उत्सव भी आयोजित होते हैं.

नवरात्रि और दुर्गा पूजा के बीच 5 प्रमुख अंतर

समयावधि और तिथियां

नवरात्रि: यह प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर पूरे 9 दिनों और 9 रातों तक चलती है.
दुर्गा पूजा: हालांकि इसकी शुरुआत महालया से मानी जाती है, लेकिन मुख्य पूजा अनुष्ठान षष्ठी से दशमी तक (5 दिन) आयोजित किए जाते हैं.

पूजा के रूप और देवी अवतार

नवरात्रि: इसमें मां भगवती के 9 अलग-अलग स्वरूपों (नवदुर्गा – जैसे शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) की हर दिन क्रम अनुसार पूजा की जाती है.
दुर्गा पूजा: इसमें मुख्य रूप से महिषासुरमर्दिनी रूप में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है, जिनके साथ लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिकेय और गणेशजी की प्रतिमाएं भी होती हैं.

व्रत और खान-पान के नियम

नवरात्रि: उत्तर और मध्य भारत में श्रद्धालु 9 दिनों का कठिन उपवास (व्रत) रखते हैं और सात्विक आहार ग्रहण करते हैं.
दुर्गा पूजा: पूर्वी भारत (विशेषकर बंगाल) में इसे एक उत्सव की तरह मनाया जाता है, जहां व्रत के बजाय महाप्रसाद और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया जाता है.

सांस्कृतिक परंपराएं और उत्सव

नवरात्रि: इसमें गरबा, डांडिया, रामलीला मंचन और अष्टमी/नवमी पर कन्या पूजन की मुख्य परंपरा होती है.
दुर्गा पूजा: इसमें षष्ठी बोधोन, संधि पूजा, धुनुची नाच और विजयादशमी के दिन शादीशुदा महिलाओं द्वारा खेला जाने वाला सिंदूर खेला मुख्य आकर्षण होता है.

क्षेत्रीय प्रभाव और समापन

नवरात्रि: मुख्य रूप से उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में बड़े पैमाने पर मनाई जाती है और इसका समापन दशहरे (रावण दहन) के साथ होता है.
दुर्गा पूजा: पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा में सर्वाधिक प्रसिद्ध है और इसका समापन विजयादशमी को प्रतिमा विसर्जन के साथ होता है.
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