गणेशजी का स्मरण करने से दूर होते हैं विघ्न: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सभी पुराणों को पढ़ने के बाद यह निश्चय हो जाता है कि- जो विशेषण भगवान राम के हैं, श्री कृष्ण के हैं, विष्णु के हैं, शिव के हैं, शक्ति के हैं वही श्रीगणेशजी के भी है।
इसका मतलब ये पांचो देवता एक ही हैं। इन्होंने तत् तत् कार्यों के लिए अपने अलग-अलग स्वरूप बना लिए हैं। जैसे मान लिया जाये कढ़ाई, तावा करछुल, चम्मच, झारा, ये हैं तो सब एक लोहे के बने हुए। एक ही तत्व के हैं,लेकिन विभिन्न कार्यों के लिए इनकी आकृतियां विभिन्न बन गई हैं।
 रोटी सेकनी है तो तावा का उपयोग होगा। सब्जी बनानी या पूडी तलनी है तो कड़ाही की जरूरत है। पूड़ी निकालनी है, हलवा बनाना है तो फिर झारे की जरूरत है। दाल चलाना है तो उसमें चम्मच करछुल की जरूरत है। रोटी पकड़नी है तो चिमटे की जरूरत है। भोजन करना है तो चम्मच की जरूरत है।
तो सबके अन्दर लोहा, लेकिन एक का काम दूसरे से नहीं हो सकता। तवा का काम कड़ाई से नहीं हो सकता। पूड़ी तवा में नहीं बन सकती। करछुल से बूंदी नहीं निकल सकती। और झारे से दाल नहीं निकल सकती। एक ही सच्चिदानंद तत्व पंचदेव हैं। सबके कार्य  अलग-अलग है। विघ्नों का निवारण कौन करेगा? उसके लिये गणेश जी का स्मरण जरूरी है।
शास्त्र का वचन है- ‘ श्रेयांसि बहुविघ्नानि’ शुभ कार्य में बहुत विघ्न आते हैं। आप साधना करने चले हैं, ईश्वर की प्राप्ति करने के लिए चले हैं। विघ्न आयेंगे, बहुत आयेंगे। इसलिए लिखा है- पहले गणेश जी का पूजन कर लेना चाहिए। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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