Sant Pankaj Ji Maharaj Satsang: विख्यात संत बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी संत पंकज जी महाराज इस समय अपनी 83 दिवसीय जनजागरण यात्रा के साथ जिला गाजीपुर में सत्संग भ्रमण पर हैं. पड़ाव के स्थानों पर दोपहर 12 बजे से सत्संग सम्पन्न हो रहे हैं. इसी क्रम में विकास खण्ड सदर के ग्राम सुभाखरपुर में आज आयोजित सत्संग में अपने प्रवचन में उन्होंने कहा मानव षरीर की प्राप्ति परमात्मा का सबसे बड़ा बरदान है. इसमें प्रभु के पाने का रास्ता है जिसका भेद सन्त महात्मा फकीर जानते हैं.
इस शरीर को हिन्दू महात्माओं ने भगवान का मन्दिर, मुसलमान फकीरों ने कुदरती काबा, ईसामसीह ने इसे भगवान का जिन्दा घर बताया. इसमें परमात्मा के देष से आने वाली आकाषवाणी, गैवी आवाजें आ रही हैं. इन्हीं आवाजों को जीवात्मा के कान (तीसरे कान) से सुनने को भजन कहते हैं. बाजे बजाना, जबान से गाना तो भजन की नकल है. जब आप बताई विधि से भजन करने लगेंगे तो सुरीली ध्वनियों को सुनकर आप का रोम-रोम पुलकित हो जायेगा. यह कलियुग का नाम योग की साधना, सन्तमत है.
महाराज श्री ने इस षब्द योग साधना की व्याख्या करते हुये बताया कि हमारे गुरु महाराज परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज सन्तमत की साधना की परतदर परत खोल कर इसे जनसुलभ बनाया और बीसों करोड़ लोगों को भजनान्दी बना दिया. मांसाहार व षराब आदि को छोड़कर षाकाहारी-सदाचारी बनना समय की मांग है. युवाओं में बढ़ती नषें की आदत चिन्ता का विशय है. उन्होंने बाबा जयगुरुदेव जी महाराज द्वारा सन् सत्तर के दषक में की गई विष्व युद्ध की भयावह स्थिति की ओर संकेत किया.
वर्तमान में सारे विष्व की स्थिति चिन्तनीय है. इसलिये आप सभी से अपील है अपने को बदलें, गांव-गांव में भजन केन्द्र बनाकर भजन करें. एक-दूसरे के काम आयें.
इस अवसर पर इन्द्रदेव यादव, बसन्त यादव, श्रीमती रीता यादव, भोला यादव, सौरभ यादव, परवेज आलम, सुभाश यादव, षाहिद अली, महेन्द्र प्रताप सिंह, अमरदेव यादव, सहयोगी संगत बाराबंकी के मुहम्मद ईषा, बिहारी लाल, राम सुरेष, राम दयाल आदि मौजूद रहे. षांति व्यवस्था में पुलिस प्रषासन का सहयोग रहा. कार्यक्रम के बाद जनजागरण यात्रा सदर वि.ख. के पिपराही विषुनपुर के लिये प्रस्थान कर गई. यहां कल (आज) दोप. 12 बजे से सत्संग आयोजित है.