Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत कब है? जानिए इस व्रत को रखने के 5 बड़े फायदे, शिव कृपा के साथ मिल सकता है 3 ग्रहों का शुभ फल

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Shukra Pradosh Vrat 2026: सनातन धर्म में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई व्रत और पर्व बताए गए हैं, लेकिन प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से साधक की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं. जून 2026 का प्रदोष व्रत कई मायनों में खास रहने वाला है, क्योंकि यह शुक्रवार के दिन पड़ रहा है. शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा.

इतना ही नहीं, इस समय अधिक मास भी चल रहा है, जिसके चलते इस व्रत का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में किए गए व्रत, जप, तप और पूजा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है. यही वजह है कि शिव भक्तों के लिए जून का शुक्र प्रदोष व्रत बेहद खास माना जा रहा है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने के साथ व्रत रखने का विधान है. मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया प्रदोष व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है.

कब रखा जाएगा शुक्र प्रदोष व्रत?

पंचांग के अनुसार शुक्र प्रदोष व्रत 12 जून 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा. यह व्रत ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ रहा है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन उपवास रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

प्रदोष व्रत पर बनेगा सर्वार्थ सिद्धि योग

इस बार शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण होने जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को बेहद शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस योग में किए गए शुभ कार्यों और नई शुरुआतों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है. पंचांग के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05:23 मिनट से 06:28 मिनट तक रहेगा.

जानिए प्रदोष व्रत करने के लाभ

1. भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है

धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं. कहा जाता है कि उनकी कृपा से साधक को जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिल सकती है.

2. मानसिक शांति मिलती है

शिव साधना को मन को शांत करने वाला माना गया है. प्रदोष व्रत और पूजा-पाठ से तनाव तथा नकारात्मक विचारों को दूर करने में सहायता मिलने की मान्यता है.

3. चंद्रमा से जुड़े दोष कम होते हैं

त्रयोदशी तिथि का संबंध चंद्रमा से माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और फलाहार करने से चंद्र तत्व मजबूत होता है तथा चंद्रमा के नकारात्मक प्रभाव कम होने लगते हैं.

4. धन, सुख और करियर में लाभ की मान्यता

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा मजबूत होने पर शुक्र और बुध ग्रह भी शुभ फल देने लगते हैं. इससे धन-समृद्धि, सुख-ऐश्वर्य, प्रेम संबंधों तथा नौकरी और कारोबार में लाभ मिलने की बात कही जाती है.

5. सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

मान्यता है कि प्रदोष व्रत का शुभ प्रभाव व्यक्ति के मन और शरीर दोनों पर पड़ता है. इससे सकारात्मक सोच विकसित होती है और जीवन में अच्छे बदलाव आने लगते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई सामान्य मान्यताओं और ज्योतिष गणनाओं पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

यह भी पढे: भक्ति ही भगवान को भक्त के समीप लाती है – दिव्य मोरारी बापू

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