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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी जिसे छोटी दिवाली भी कहते हैं। आज का दिन बड़ा महत्वपूर्ण है। आज हनुमान जयन्ती है। कल्प भेद से श्री हनुमान जी के प्राकट्य की दो कथा है। पहली कथा नववर्ष का प्रारम्भ महीना चैत्रमास की पूर्णिमा को हुआ। अतः राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र पश्चिम और दक्षिण भारत में चैत्रमास पूर्णिमा तिथि पर श्रीहनुमान जयन्ती का उत्सव मनाया जाता है।
दूसरी कथा- श्री हनुमान जी का अवतार दीपावली के एक दिन पहले कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी के दिन हुआ। उत्तर और पूर्व भारत में हनुमान जयन्ती आज के दिन मनायी जाती है। श्री अयोध्या जी में भी श्री हनुमान जयन्ती कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी को मनायी जाती है। श्री हनुमान जी के उपासक नित्य पूजा-पाठ के माध्यम से श्री हनुमान जी का उत्सव मनाते हैं। सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शनिवार तथा वर्ष में दो दिन कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी एवं चैत्रमास की पूर्णिमा को मनाते हैं।
आज के दिन श्री हनुमान जी का विशेष पूजा पाठ करना चाहिए।श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार आज के दिन भगवान श्री कृष्ण ने भौमासुर जिसका एक नाम नरकासुर भी था उसका उद्धार करके, देव माता अदिति के कुण्डल, वरुणदेव का क्षत्र और सोलह हजार एक सौ राज कन्याओं को मुक्त कराकर संसार को संकट से बचाये। इसलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। आज के दिन भगवान की आराधना,उपासना,पूजन करके नरक के भय से मुक्ति पाया जाता है।
आज के दिन माँ काली का प्राकट्य हुआ। जिन मां काली ने असुरों का संहार किया। आज के दिन को काली चौदस भी कहते हैं। आज भगवती के आराधक विशेष रूप से मन्त्र की आराधना करते हैं। तंत्र साधना वाले मां काली और हनुमान जी की सिद्धि के लिए विविध हवन यज्ञ अनुष्ठान करते हैं। आज के दिन पूजा पाठ आराधना उपासना करके आरोग्यता और सुंदर रूप की प्राप्ति होती है इसलिए इसे रूप चौदस भी कहते हैं। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।