Account Aggregator: भारत का अकाउंट एग्रीगेटर (AA) इकोसिस्टम वित्तीय क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह मजबूत कर रहा है. गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अकाउंट एग्रीगेटर व्यवस्था के जरिए अनुमानित 3.82 लाख करोड़ रुपये के लोन वितरित किए गए. यह रकम करीब 3.68 करोड़ कर्जों के जरिए बांटी गई. रिपोर्ट के अनुसार, भारत की रिटेल और एमएसएमई लेंडिंग में अकाउंट एग्रीगेटर की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है. मूल्य के आधार पर इसकी हिस्सेदारी 8.4 प्रतिशत और लोन की संख्या के आधार पर 11.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
होम लोन और प्रॉपर्टी लोन में भी बढ़ी हिस्सेदारी
आरबीआई से मान्यता प्राप्त अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम के सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गेनाइजेशन (SRO) सहमति की रिपोर्ट में बताया गया है कि AA के जरिए होम लोन और लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी के वितरण में भी तेज बढ़ोतरी हुई है. वित्त वर्ष 2025-26 में AA-सक्षम होम लोन और लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी के तहत 1.09 लाख लोन दिए गए. इनकी कुल राशि 20,777 करोड़ रुपये रही. पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले यह सालाना आधार पर 624 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि है.
अब सिक्योर्ड लोन में भी बढ़ रहा इस्तेमाल
अकाउंट एग्रीगेटर की भूमिका अब सिर्फ बिना गारंटी वाले रिटेल लोन तक सीमित नहीं रह गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्यवस्था का इस्तेमाल सिक्योर्ड क्रेडिट यानी सुरक्षित कर्ज के लिए भी तेजी से बढ़ रहा है. इस विस्तार में बैंकों की भागीदारी भी अहम रही है. मुख्यधारा के वित्तीय संस्थानों द्वारा AA व्यवस्था को अपनाने से इसका दायरा लगातार बढ़ा है. वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में AA के जरिए दिए गए कुल लोन के मूल्य में बैंकों की हिस्सेदारी 47.3 प्रतिशत रही. यह हिस्सेदारी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFCs के लगभग बराबर पहुंच गई.
वित्तीय समावेशन को मिल सकता है बढ़ावा
रिपोर्ट में अकाउंट एग्रीगेटर व्यवस्था को वित्तीय समावेशन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया गया है. इस प्लेटफॉर्म से जुड़े संस्थानों के आंकड़ों के मुताबिक, ऐसे कर्जदार जिनका पहले कोई औपचारिक क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं था, यानी न्यू-टू-क्रेडिट बॉरोअर्स, AA के जरिए हुए कुल लोन वितरण में संख्या के आधार पर 18.2 प्रतिशत रहे. महिला उधारकर्ताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही. कुल लोन की संख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी 19.8 प्रतिशत रही, जबकि वितरित राशि के आधार पर यह 19.1 प्रतिशत थी.
कर्ज देने की प्रक्रिया हो सकती है तेज
सहमति की मुख्य नीति और एडवोकेसी अधिकारी शालिनी गुप्ता ने कहा कि जैसे-जैसे ज्यादा वित्तीय सूचना स्रोत इस व्यवस्था से जुड़ेंगे, अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क कर्ज देने की प्रक्रिया को तेज और अधिक समावेशी बनाने में मदद कर सकता है. इससे वित्तीय संस्थानों और ग्राहकों दोनों के लिए लेंडिंग प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है. अकाउंट एग्रीगेटर व्यवस्था में ग्राहक की सहमति के बाद उसकी वित्तीय जानकारी को सुरक्षित तरीके से साझा किया जाता है. इससे बैंक और अन्य कर्जदाता उधारकर्ता की वित्तीय स्थिति का बेहतर आकलन कर सकते हैं.
GST, CBDT और EPFO से जुड़ने पर बढ़ेगी क्षमता
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में GST, CBDT और EPFO जैसे वित्तीय और आय से जुड़े सूचना स्रोतों के अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम से जुड़ने की संभावना इसकी क्षमता को और बढ़ा सकती है. इन स्रोतों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर कैश फ्लो यानी नियमित आय और नकदी प्रवाह को ध्यान में रखकर कर्ज देने की व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है. इससे रिटेल, MSME और सिक्योर्ड लेंडिंग में नए अवसर खुलने की संभावना है और भारत के अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम के विस्तार का अगला चरण और तेज हो सकता है.

