Agriculture Credit News: 10 साल में 4 गुना बढ़ा कृषि ऋण, 32.50 लाख करोड़ रुपये पहुंचा लोन, सरकार ने जारी किए आंकड़े

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Agriculture Credit: भारत के कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों तक सस्ती व आसान वित्तीय सहायता पहुंचाने की दिशा में पिछले एक दशक में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. सरकार की ओर से जारी नई फैक्टशीट के अनुसार, किसानों को दिए जाने वाले कृषि ऋण में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि क्षेत्र को दिया जाने वाला कुल ऋण बढ़कर 32.50 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह आंकड़ा केवल 8 लाख करोड़ रुपये था. यानी करीब 10 वर्षों में कृषि ऋण चार गुना से भी अधिक बढ़ गया है. सरकार का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार, नाबार्ड की सक्रिय भूमिका और विभिन्न सरकारी योजनाओं की वजह से किसानों तक संस्थागत ऋण की पहुंच लगातार बढ़ी है.

10 साल में चार गुना से ज्यादा बढ़ा कृषि ऋण

सरकार द्वारा जारी फैक्टशीट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2014-15 में कृषि क्षेत्र के लिए कुल ऋण लक्ष्य 8 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 32.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि किसानों और कृषि से जुड़े क्षेत्रों में औपचारिक बैंकिंग प्रणाली के जरिए ऋण वितरण लगातार मजबूत हुआ है. फैक्टशीट के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 से 2023-24 के बीच ग्रामीण ऋण इकोसिस्टम में औसतन करीब 13 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है.

नाबार्ड निभा रहा है अहम भूमिका

कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण बढ़ाने में नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. नाबार्ड बैंकों को कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए अल्पकालिक (Short-Term) और दीर्घकालिक (Long-Term) ऋण उपलब्ध कराने हेतु रीफाइनेंस सहायता प्रदान करता है. इससे बैंकों की ऋण देने की क्षमता बढ़ती है और किसानों को अधिक आसानी से वित्तीय सहायता मिल पाती है.

ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में आया सुधार

फैक्टशीट में नाबार्ड के ग्रामीण आर्थिक स्थिति एवं भावना सर्वेक्षण (मई 2026) का भी उल्लेख किया गया है. सर्वेक्षण के अनुसार, करीब 77.2 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों ने अपने उपभोग स्तर में वृद्धि होने की जानकारी दी है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती क्रय शक्ति और लगातार बनी हुई मांग का संकेत माना जा रहा है. इसके अलावा, औपचारिक वित्तीय संस्थानों तक लोगों की पहुंच भी पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है. आंकड़ों के मुताबिक करीब 51 प्रतिशत परिवार केवल औपचारिक स्रोतों से ऋण ले रहे हैं, जबकि 27 प्रतिशत से अधिक परिवार संस्थागत और गैर-संस्थागत दोनों माध्यमों से ऋण प्राप्त कर रहे हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ा बैंकिंग नेटवर्क

सरकार के अनुसार, वर्ष 2014 में ग्रामीण क्षेत्रों में 41,464 अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक शाखाएं थीं. जुलाई 2025 तक इनकी संख्या बढ़कर 56,193 हो गई, यानी करीब 35 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं और ऋण वितरण को काफी मजबूती मिली है. इसके अलावा, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय हैं. इनका नेटवर्क 700 जिलों में 22,000 से अधिक शाखाओं तक फैला हुआ है, जिससे दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में भी बैंकिंग सेवाएं पहुंच रही हैं.

सहकारी बैंक और PACS भी निभा रहे अहम जिम्मेदारी

ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत ऋण के विस्तार में सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है. इन संस्थाओं ने विशेष रूप से दूरस्थ और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में बैंकिंग की आदत विकसित करने और किसानों तक ऋण पहुंचाने में अहम योगदान दिया है. आरबीआई और नाबार्ड के आंकड़ों के अनुसार, देश के सहकारी बैंकिंग नेटवर्क में 1,458 शहरी सहकारी बैंक, 34 राज्य सहकारी बैंक और 352 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक शामिल हैं.

गरीब परिवारों को भी मिल रहा योजनाओं का लाभ

सरकार ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के जरिए भी ग्रामीण गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया है. इस योजना के तहत गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जोड़ा जाता है ताकि उनकी आय बढ़ सके और जीवन स्तर में सुधार हो. 10 जुलाई 2026 तक देशभर में 19.83 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय थे. योजना की शुरुआत से अब तक इनके माध्यम से 13.28 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित किया जा चुका है.

50 हजार से ज्यादा बैंक सखी कर रही हैं मदद

ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में बैंक सखी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. फरवरी 2026 तक देशभर में 50,548 बैंक सखी तैनात की जा चुकी थीं. इनकी मदद से वर्ष 2013-14 से अब तक स्वयं सहायता समूहों को 12.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया है.

जन धन योजना से भी बढ़ी वित्तीय भागीदारी

प्रधानमंत्री जन धन योजना भी ग्रामीण और वंचित समुदायों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही है. 24 जून 2026 तक देशभर में 58.63 करोड़ से अधिक जन धन खाते खोले जा चुके थे, जिनमें 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा थी. इन खातों में 32.68 करोड़ खाते (55.7%) महिलाओं के नाम पर हैं, जबकि 45.62 करोड़ खाते (77.8%) ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं. इससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय समावेशन की दिशा में सरकार की योजनाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है.

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