AI in MSME Sector: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है. अनुमान है कि 2035 तक AI इस सेक्टर के मूल्य सृजन में 135.6 से 149.9 अरब डॉलर तक का योगदान दे सकती है.
रिपोर्ट में सामने आया बड़ा अनुमान
यह अनुमान उस स्थिति में लगाया गया है जब भारत के कुल मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू एडेड में MSME की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच जाए. यह जानकारी शनिवार को जारी PwC India और Observer Research Foundation (ORF) की संयुक्त रिपोर्ट में सामने आई है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बढ़ सकती है हिस्सेदारी
रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारत अपने जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक बढ़ाने में सफल होता है और MSME की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 के 35.4 प्रतिशत से बढ़कर 2047 तक 50 प्रतिशत हो जाती है, तो यह सेक्टर 3.13 से 3.21 ट्रिलियन डॉलर तक की विकास संभावनाएं खोल सकता है.
एमएसएमई के लिए गेमचेंजर बन सकती है AI
PwC India के चेयरपर्सन संजय कृष्ण ने कहा कि अब AI केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा है. अगर इसे सहायक तकनीक के रूप में इस्तेमाल किया जाए, तो यह MSME को कम उत्पादकता के जाल से बाहर निकलने और गुणवत्ता, गति तथा नवाचार के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद कर सकता है. उन्होंने कहा कि AI को ऐसा बनाया जाना चाहिए जो सभी आकार के व्यवसायों के लिए सुलभ, किफायती और उपयोगी हो. इससे MSME अपनी संरचनात्मक सीमाओं को पार कर सकते हैं और वैश्विक मूल्य शृंखला में बेहतर तरीके से शामिल हो सकते हैं.
पूरी वैल्यू चेन को बदल सकती है AI तकनीक
रिपोर्ट में कहा गया है कि AI मैन्युफैक्चरिंग MSME की पूरी वैल्यू चेन को बदल सकता है. इसमें मशीनों की पहले से मरम्मत की भविष्यवाणी, ऊर्जा अनुकूलन, कैमरा आधारित गुणवत्ता जांच, AI आधारित लोन मूल्यांकन, बहुभाषी ग्राहक सेवा, नियमों का पालन और जनरेटिव डिजाइन जैसे कई उपयोग शामिल हैं.
AI से तकनीकी क्षमता की बाधाएं कम होंगी और बड़े पैमाने पर उत्पादन की लागत भी घटेगी. इससे छोटे उद्योग बेहतर गुणवत्ता, वैश्विक मानकों और तेज उत्पादन हासिल कर सकेंगे.
डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर से भी मिलेगा अवसर
रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़े निवेश की संभावना है. इससे MSME सेक्टर को भी फायदा मिलेगा क्योंकि वे कूलिंग उपकरण, हार्नेस और औद्योगिक पुर्जों जैसे गैर-तकनीकी पूंजीगत सामान की आपूर्ति कर सकते हैं. अनुमान है कि इससे लंबे समय में 100 से 150 अरब डॉलर तक का नया मैन्युफैक्चरिंग अवसर पैदा हो सकता है.
नीतियों और सहयोग से बढ़ेगा AI का असर
ORF के अध्यक्ष समीर सरन ने कहा कि भारत में AI की सफलता केवल नई खोजों पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि इस बात पर निर्भर करेगी कि यह तकनीक देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था में कितनी व्यापक और समान रूप से फैलती है. उन्होंने कहा कि MSME इस बदलाव के केंद्र में हैं और सही नीतियों, उद्योग और समाज के सहयोग से AI को अपनाकर प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सकती है, रोजगार सुरक्षित रखा जा सकता है और समावेशी विकास को आगे बढ़ाया जा सकता है.
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