AI भारत के लिए बड़ा मौका, रोजगार के अवसर बढ़ाने में करेगा मदद: इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
एआई भारत के लिए एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश को केवल उपयोगकर्ता नहीं बल्कि निर्माता की भूमिका निभानी है, तो एआई के जरिए ऐसे समाधान तैयार करने होंगे जिनकी वैश्विक स्तर पर मांग हो. इससे न सिर्फ तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. यह बातें सोमवार को आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में विशेषज्ञों ने कही.
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कोरोवर एआई और भारतजीपीटी एआई के संस्थापक और सीईओ अंकुश सभरवाल ने कहा, मौजूदा समय में जो भी ऐप्स आ रहे हैं उनमें एआई का उपयोग हो रहा है. आगे इसमें और बढ़ोतरी होगी. ऐसे हम सभी धीरे-धीरे एआई के यूजर बनेंगे. ऐसे में एआई भारत के लिए क्रिएटर बनने का बड़ा अवसर है, क्योंकि इससे सॉल्यूशंस बनाना आसान हो गया है, अब केवल इंजीनियर ही नहीं कोई व्यक्ति भी ऐप बना सकता है. इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं.
खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के राष्ट्रीय तकनीकी समन्वयक संजय सेठी ने कहा कि यहां बड़ी संख्या में लोग एआई के प्रभावों को समझने आए हैं. कृषि क्षेत्र में एआई काफी बदलाव ला सकता है. यह मौसम को समझने, खेती के समय सही आवश्यकताओं का अनुमान लगाने और खाद्य श्रृंखला को छोटा करने में काफी मदद कर सकता है. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दो से तीन वर्षों में कृषि क्षेत्र पर एआई का प्रभाव अधिक देखने को मिलेगा. इस एआई समिट में युवा भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं.
युवा इनोवेटर अखिला पसुपुलेटी ने आईएएनएस को बताया कि उनके समाधान का नाम “देश के हाथ” है. यह एक एआई-आधारित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जहां देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं. इस प्लेटफॉर्म के जरिए बिचौलियों की भूमिका कम हो जाती है, जिससे कारीगरों को सीधे लाभ मिलता है और ग्राहक सीधे निर्माताओं से जुड़ पाते हैं.
एक अन्य युवा सृष्टि पुरोहित कहती हैं, मेरा इनोवेशन मूल रूप से क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम से पीड़ित रोगियों के लिए एक वेब ऐप है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें लगातार थकान, नींद की समस्या रहती है और बहुत दर्द होता है. इसका प्रबंधन करना बहुत कठिन है और भारत में सामाजिक कारणों के चलते इसे अक्सर कमजोरी कहा जाता है. इसलिए मैंने क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम से पीड़ित रोगियों को अपनी स्थिति को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद करने के लिए एनरविजन विकसित किया है.
सुभांगी सिंह ने आईएएनएस को बताया, मेरे इनोवेशन का नाम आईजीएसएस है, जिसका पूरा नाम इंटेलिजेंट ग्रेन स्टोरेज सिस्टम है. दरअसल, भारत में हर साल लाखों टन अनाज भंडारण के खराब तरीकों के कारण बर्बाद हो रहा है. भारत में अभी भी बड़ी संख्या में अवैज्ञानिक और अपरंपरागत भंडारण विधियों का प्रयोग किया जा रहा है. इसी समस्या को दूर करने के लिए मैंने अपना आविष्कार, इंटेलिजेंट ग्रेन स्टोरेज सिस्टम बनाया है. यह प्रणाली अनाज भंडारण की वास्तविक समय में निगरानी करती है और संभावित जोखिम का पहले ही अनुमान लगा लेती है. इसके आधार पर स्वचालित नियंत्रण व्यवस्था सक्रिय हो जाती है और पर्यवेक्षक को तुरंत चेतावनी भेजी जाती है, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाकर नुकसान को रोका जा सके.
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